अभिनेता राजपाल यादव को 7.5 करोड़ रुपए के भुगतान से जुड़े चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा. अदालत ने पिछली दिशा-निर्देशों के पालन में देरी पर कड़ी टिप्पणी की और उन्हें भुगतान करने का अंतिम अवसर दिया.
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने 50 लाख रुपए के डिमांड ड्राफ्ट की फोटो कॉपी पेश की गई. इस पर जस्टिस जॉयमाला बागची ने राजपाल यादव के वकील को कड़ी फटकार लगाई. अदालत ने कहा कि मामले में रवैया उचित होना चाहिए और सुनवाई के दौरान कब और कैसे बोलना है, इसका ध्यान रखना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह राजपाल यादव की याचिका खारिज कर सकता है. हालांकि, अदालत ने तत्काल ऐसा नहीं किया ताकि शिकायतकर्ता को रकम मिल सके. कोर्ट ने भुगतान के लिए मंगलवार तक अंतिम मौका दिया है. मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी और इसे दिन का पहला मामला रखा गया है.
सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को इस मामले में राहत देते हुए दो सप्ताह के भीतर 2 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने और बकाया रकम के लिए जमानत देने का निर्देश दिया था. राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों का है. दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने की सजा सुनाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अब भुगतान को लेकर उन्हें स्पष्ट रूप से अंतिम अवसर दिया है.
मामले की जड़ राजपाल यादव की 2012 में निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ी है. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थी और इसे बनाने के लिए कथित तौर पर लिया गया कर्ज ब्याज के साथ बढ़ता गया. लंबे समय से चले आ रहे इस मामले ने अभिनेता पर आर्थिक और व्यक्तिगत दबाव भी डाला.
राजपाल यादव ने जेल जाने से पहले इस मामले के कारण पैदा हुई आर्थिक और भावनात्मक परेशानियों का जिक्र किया था. उनकी गिरफ्तारी के बाद सलमान खान, सोनू सूद सहित कुछ लोगों द्वारा आर्थिक मदद की पेशकश किए जाने की भी खबरें सामने आई थीं. अब सुप्रीम कोर्ट के सामने उनके लिए भुगतान संबंधी आदेश का पालन करना अहम हो गया है.