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140 फिल्मों की सुपरस्टार से 6 बार की सीएम तक, जानिए जयललिता की जयंती पर 'अम्मा' की अनोखी कहानी

आज अभिनेत्री से राजनीति में आई जयललिता की जन्म जयंती है. 24 फरवरी 1948 को जन्मी जयललिता ने 140 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और तमिलनाडु की छह बार मुख्यमंत्री बनीं. ‘अम्मा’ के नाम से जानी गईं, उन्होंने 2016 में 67 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा. उनकी शादी में डेढ़ लाख मेहमान आए थे. 

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
140 फिल्मों की सुपरस्टार से 6 बार की सीएम तक, जानिए जयललिता की जयंती पर 'अम्मा' की अनोखी कहानी
Courtesy: pintrest

दक्षिण भारतीय सिनेमा और राजनीति की दिग्गज जयललिता आज अपनी 78वीं जयंती पर याद की जा रही हैं. 13 साल की छोटी उम्र में फिल्मों में कदम रखने वाली जयललिता ने तीन दशक तक पर्दे पर राज किया. बाद में राजनीति में आकर उन्होंने तमिलनाडु की सत्ता पर छह बार कब्जा जमाया. लाखों लोगों की 'अम्मा' और 'थलाइवी' कहलाने वाली जयललिता का जीवन संघर्ष, सफलता और जन-समर्थन की मिसाल है. 2016 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी छाप आज भी बरकरार है.

फिल्मी सफर की शुरुआत

जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को कर्नाटक के मेलकोट में हुआ था. 13 साल की उम्र में उन्होंने कन्नड़ फिल्म ‘श्रीशैला महात्मे’ से डेब्यू किया था. इसके बाद तमिल, तेलुगू और हिंदी सिनेमा में काम किया. करीब तीन दशक के करियर में 140 से ज्यादा फिल्में कीं. एमजी रामचंद्रन के साथ 28 और शिवाजी गणेशन के साथ 17 फिल्में सबसे यादगार रहीं. 

राजनीति में धमाकेदार एंट्री

फिल्मों के बाद जयललिता ने राजनीति में कदम रखा. 1989 में एआईएडीएमके की सुप्रीमो बनीं. पहली बार 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री चुनी गईं. इसके बाद 2001, 2002, 2011, 2015 और 2016 में भी सीएम बनीं. छह बार मुख्यमंत्री बनना उनकी राजनीतिक ताकत का सबूत है. जनता उन्हें ‘अम्मा’ कहकर पुकारती थी.

बेटे की शादी का भव्य आयोजन

जयललिता ने कभी शादी नहीं की, लेकिन 1995 में शशिकला के भतीजे वी.एन. सुधाकरन को गोद लिया था. 7 सितंबर 1995 को उनकी शादी में करीब डेढ़ लाख मेहमान शामिल हुए. जयललिता ने इस शादी पर खूब खर्च किया. यह आयोजन उस समय सुर्खियों में रहा और उनकी शानो-शौकत का प्रतीक बन गया.

अंतिम यात्रा और विरासत

67 साल की उम्र में 2016 में चेन्नई में जयललिता का निधन हो गया. उनकी अंतिम यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए. जनता ने उन्हें ‘थलाइवी’ और ‘अम्मा’ के नाम से याद किया. आज भी तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता और योगदान को लोग याद करते हैं. उनकी जिंदगी संघर्ष और सफलता की मिसाल बनी हुई है.

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