Mahaprabhu Jagannath Release: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने साफ कहा कि यह फिल्म भगवान जगन्नाथ की भक्ति और श्रद्धा को किसी भी तरह कम नहीं करती. इस फैसले के साथ ही अदालत ने धार्मिक संवेदनशीलता के नाम पर बार-बार फिल्मों और कलाकृतियों पर रोक लगाने की याचिकाओं पर भी चिंता जताई.
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि अगर हर बार कुछ लोगों की संवेदनाओं के आधार पर कला पर पाबंदी लगाई जाने लगी, तो रामायण-महाभारत जैसी महान कथाओं पर आधारित फिल्में, टीवी सीरियल, पेंटिंग्स या अन्य रचनाएं कभी नहीं बन पाएंगी. कोर्ट ने 17 जुलाई के अपने पुराने आदेश को भी बरकरार रखा, जिसमें फिल्म निर्माता को पुरी में रथ यात्रा समाप्त होने के बाद, यानी 28 जुलाई के बाद फिल्म रिलीज करने की अनुमति दी गई थी.
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और एक भक्त द्वारा दायर याचिकाओं में फिल्म के एनिमेटेड रूप को आपत्तिजनक बताया गया था. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि भगवान जगन्नाथ को एनिमेशन के जरिए दिखाना उनकी गरिमा के खिलाफ है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा- 'भक्ति भावना को बनाए रखते हुए रचनात्मक स्वतंत्रता भी जरूरी है.'
यह फिल्म भगवान जगन्नाथ की जीवन गाथा और उनके दिव्य लीला को एनिमेशन के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास है. निर्माताओं का मानना है कि आधुनिक बच्चों और युवाओं को धार्मिक कहानियां आसानी से समझाने के लिए एनिमेटेड फॉर्मेट सबसे बेहतर तरीका है. फिल्म में भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक संदेश को रोचक तरीके से पेश किया गया है.