वकालत की पढ़ाई छोड़ इस हीरो ने 750 रुपये के लालच में शुरू की थी एक्टिंग, 20 साल बाद मिला मेहनताना
फारुक शेख का सफर बेहद दिलचस्प रहा है. वकील बनने का सपना लेकर मुंबई आए इस कलाकार ने सिर्फ 750 रुपये के लालच में एक्टिंग शुरू की और फिर भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना ली.
मुंबई: आज 25 मार्च को दिग्गज एक्टर फारुक शेख का जन्मदिन है. उनका जीवन उन कलाकारों में गिना जाता है, जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपने दम पर इंडस्ट्री में पहचान बनाई है. दिलचस्प बात यह है कि उनका सपना कभी एक्टर बनने का नहीं था. वह मुंबई में वकालत की पढ़ाई कर रहे थे और अपने पिता की तरह एक सफल वकील बनना चाहते थे.
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कॉलेज के दिनों में ही उन्हें फिल्मों में छोटे रोल करने का मौका मिलने लगा, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी.
750 रुपये का ऑफर बना जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
फारुक शेख ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके कॉलेज के दौरान मशहूर डायरेक्टर एमएस सथ्यू फिल्म गर्म हवा बना रहे थे. फिल्म का बजट बेहद कम था और ऐसे कलाकारों की तलाश थी, जो बिना ज्यादा पैसे की मांग किए काम करने को तैयार हों. फारुक और उनके दोस्तों ने सोचा कि वह छोटे रोल कर लेंगे. लेकिन किस्मत ने यहां भी बड़ा मोड़ दिया और उन्हें फिल्म में अहम किरदार मिल गया. उन्होंने 750 रुपये में फिल्म साइन की. उस समय यह रकम छोटी जरूर थी, लेकिन उनके लिए एक नया रास्ता खोलने वाली साबित हुई.
20 साल बाद मिला मेहनताना
इस कहानी का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा यह है कि उन्हें इस फिल्म के लिए 750 रुपये पूरे 20 साल बाद मिले. फारुक शेख ने खुद मजाकिया अंदाज में कहा था कि 750 रुपये के लालच में उन्होंने फिल्म कर ली, लेकिन पैसे मिलने में दो दशक लग गए. हालांकि, यह देरी उनके लिए मायने नहीं रखती थी, क्योंकि इस फिल्म ने उन्हें पहचान दी और उनके करियर की नींव रखी.
फिल्म गर्म हवा का एक खास कनेक्शन शबाना आजमी से भी था. वह और फारुक शेख कॉलेज के दोस्त थे. इस फिल्म की कहानी मशहूर शायर कैफी आजमी ने लिखी थी और इसमें शबाना आजमी की मां शौकत आजमी ने भी अहम भूमिका निभाई थी. यही वजह रही कि यह फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं बल्कि कई कलाकारों के लिए एक भावनात्मक सफर बन गई.
शानदार फिल्मों से बनाया अलग मुकाम
फारुक शेख ने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया, जो आज भी दर्शकों के दिल में बसती हैं. उनकी प्रमुख फिल्मों में उमराव जान, बाजार, चश्मे बद्दूर, नूरी, कथा और ये जवानी है दीवानी शामिल हैं. उनकी अभिनय शैली सादगी और गहराई से भरी होती थी. वह अपने किरदारों को इस तरह निभाते थे कि दर्शक उनसे जुड़ाव महसूस करते थे.
सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं, फारुक शेख ने टेलीविजन पर भी अपनी पहचान बनाई. 1988 से 2002 तक उन्होंने कई शो में काम किया और दर्शकों के बीच लोकप्रिय बने रहे. उनका सहज अंदाज और सच्चाई से भरा अभिनय उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता था.
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