Tamil Nadu: ज्योतिषी को OSD बनाने पर घिरे सीएम विजय, विवाद बढ़ने के बाद राधान पंडित वेट्रीवेल की नियुक्ति रद्द

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विवाद बढ़ने के बाद ज्योतिषी राधान पंडित वेट्रीवेल की ओएसडी नियुक्ति रद्द कर दी. कांग्रेस और सहयोगी दलों ने फैसले का विरोध किया था.

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Dhiraj Kumar Dhillon

तमिलनाडु की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई, जब मुख्यमंत्री विजय के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में नियुक्त किए गए राधान पंडित वेट्रीवेल की नियुक्ति अचानक रद्द कर दी गई. सरकार की ओर से इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि कर दी गई है. राधान पंडित वेट्रीवेल को हाल ही में मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उनकी नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर काफी चर्चा भी हुई थी. हालांकि, नियुक्ति के कुछ ही समय बाद सरकार ने आदेश वापस लेते हुए उनका अपॉइंटमेंट रद्द कर दिया. 

सरकार ने नहीं बताई फैसले की वजह

फिलहाल सरकार की तरफ से यह साफ नहीं किया गया है कि नियुक्ति रद्द करने के पीछे क्या वजह रही. लेकिन इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा सकता है. तमिलनाडु में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े पदों को बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि OSD सीधे तौर पर मुख्यमंत्री और प्रशासन के बीच समन्वय का काम करता है. ऐसे में किसी नियुक्ति का अचानक रद्द होना चर्चा का विषय बन गया है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आगे इस पद पर किसे जिम्मेदारी सौंपती है और क्या इस फैसले पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आता है.

विपक्ष के निशाने पर आ गई थी नियु‌क्ति

डीएमडीके प्रमुख प्रेमालता विजयकांत ने ज्योतिषी को ओएसडी बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के ओएसडी के रूप में एक ज्योतिषी की नियुक्ति की निंदा करती हूं. उन्होंने सवाल उठाए थे कि आप सूबे के युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैं. अगर आपके ज्योतिषी हैं तो उन्हें निजी स्तर तक ही रखें. इतना ही नहीं सरकार में टीवीके की सहयोगी कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री के इस फैसले पर असहमति जताई थी. कांग्रेस सांसद ससिकांत सेंथिल ने एक्स पर पोस्ट करके इस फैसले को समझ से परे बताया था. वीसीके महासचिव डी. रविकुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि धर्मनिरपेक्ष सरकार को यह शोभा नहीं देता, हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने सीएम विजय के इस फैसले का समर्थन किया था.