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ऑफिस के साथ-साथ रोज 4 घंटे 49 मिनट घर संभालती हैं महिलाएं, पुरुष सिर्फ 1.5 घंटे; सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

रिपोर्ट की सबसे अच्छी खबर शिक्षा क्षेत्र से आई है. उच्च शिक्षा (हायर एजुकेशन) में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) 30.2 पहुंच गया है, जो पुरुषों के 28.9 से ज्यादा है. स्कूली शिक्षा के हर स्तर पर अब लड़के और लड़कियों की संख्या लगभग बराबर हो गई है. बेटियां अब डिग्री हासिल करने में लड़कों से आगे हैं.

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Edited By: Antima Pal
ऑफिस के साथ-साथ रोज 4 घंटे 49 मिनट घर संभालती हैं महिलाएं, पुरुष सिर्फ 1.5 घंटे; सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट
Courtesy: pinterest

आज की आधुनिक भारतीय महिलाएं पढ़ाई, नौकरी और करियर में पुरुषों को पीछे छोड़ रही हैं, लेकिन घर पहुंचते ही पुराना बोझ फिर से उनके कंधों पर आ जाता है. केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट 'भारत में महिला और पुरुष 2025' ने महिलाओं की इस दोहरी जिंदगी की सच्चाई सामने रख दी है.

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय महिलाएं घरेलू कामों में रोजाना औसतन 289 मिनट (करीब 5 घंटे) खर्च करती हैं, जबकि पुरुष सिर्फ 88 मिनट (डेढ़ घंटे से भी कम). यानी महिलाएं पुरुषों से तीन गुना ज्यादा समय घर संभालने में लगाती हैं. ऑफिस में मैनेजर बनने के बाद भी चूल्हा-चौका, बच्चों की देखभाल और घर की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं पर रहती है.

शिक्षा में महिलाएं आगे निकलीं

रिपोर्ट की सबसे अच्छी खबर शिक्षा क्षेत्र से आई है. उच्च शिक्षा (हायर एजुकेशन) में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) 30.2 पहुंच गया है, जो पुरुषों के 28.9 से ज्यादा है. स्कूली शिक्षा के हर स्तर पर अब लड़के और लड़कियों की संख्या लगभग बराबर हो गई है. बेटियां अब डिग्री हासिल करने में लड़कों से आगे हैं.

करियर में जबरदस्त उछाल

महिलाओं ने प्रबंधकीय और मैनेजरियल पदों पर भी शानदार प्रदर्शन किया है. इन पदों पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या में 102.54 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. यानी महिलाएं अब सिर्फ नौकरी नहीं कर रही हैं, बल्कि बड़े-बड़े पदों पर फैसले ले रही हैं.

लिंग अनुपात में सुधार

समाज की सोच बदल रही है, इसका सबूत लिंग अनुपात से भी मिलता है. जन्म के समय लिंग अनुपात 2017-19 के 904 से बढ़कर 2021-23 में 917 हो गया है. स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी महिलाओं की स्थिति बेहतर हुई है.

दोहरी जिंदगी की सच्चाई

रिपोर्ट साफ बताती है कि महिलाएं बाहर तो पुरुषों के बराबर या उनसे आगे हैं, लेकिन घर के अंदर आज भी असमानता बरकरार है. सुबह ऑफिस की तैयारी, दिनभर काम और शाम को फिर घर संभालना – ये रूटीन कई महिलाओं का रोज का सच है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ने के बावजूद घरेलू कामों का बोझ कम नहीं हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि अब पुरुषों को भी घरेलू जिम्मेदारियों में बराबर हिस्सेदारी लेनी चाहिए.

आज की महिला पढ़ी-लिखी, सशक्त और महत्वाकांक्षी है. वह मैनेजर भी बन रही है और सपनों को पूरा भी कर रही है. लेकिन असली बदलाव तब होगा, जब घर के कामों में भी बराबरी आए. रिपोर्ट महिलाओं की प्रगति की तारीफ के साथ-साथ यह भी याद दिलाती है कि अभी और बहुत कुछ करना बाकी है. देश की बेटियां आगे बढ़ रही हैं – ये अच्छी खबर है. अब जरूरत है कि समाज और परिवार भी उन्हें पूरा साथ दें.