नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम के बाद सामने आए एक विवाद पर स्पष्टीकरण जारी किया है. मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि आकांक्षा सिंह नाम की दो अभ्यर्थियों ने रैंक 301 हासिल करने की बात कही है.
इस दावे ने उम्मीदवारों और प्रतियोगी छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी. अब आयोग ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया है कि रैंक 301 केवल एक ही उम्मीदवार को मिली है और उसके विवरण भी सार्वजनिक कर दिए गए हैं.
सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम 6 मार्च 2026 को घोषित किया गया था. परिणाम जारी होने के कुछ ही समय बाद खबरें सामने आई कि आकांक्षा सिंह नाम की दो अलग-अलग उम्मीदवार रैंक 301 होने का दावा कर रही हैं. इस खबर ने सोशल मीडिया पर तेजी से ध्यान खींचा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन गया.
जानकारी के अनुसार, बिहार की एक आकांक्षा सिंह ने अपना एडमिट कार्ड साझा किया, जिसमें रोल नंबर 0856794 दिखाया गया था. हालांकि, उसी दस्तावेज के बारकोड में अलग नंबर 0856569 दिखाई देने की बात सामने आई. इसके बाद लोगों ने दस्तावेज की सत्यता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. धीरे-धीरे यह मामला चर्चा में आ गया और इसकी जांच की मांग उठने लगी. जांच में यह सामने आया कि बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह का दावा सही नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, वह परीक्षा में शामिल ही नहीं हुई थी. बताया गया कि उनके द्वारा दिखाए गए दस्तावेज वैध नहीं थे.
UPSC ने स्पष्ट किया कि आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार सिविल सेवा परीक्षा 2025 में रैंक 301 केवल एक उम्मीदवार को मिली है. आयोग के अनुसार यह रैंक आकांक्षा सिंह को मिली है, जिनका रोल नंबर 0856794 है. आयोग ने बताया कि उनके पिता का नाम रणजीत सिंह और माता का नाम नीलम सिंह है. वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के अभईपुर गांव की निवासी हैं.
सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. UPSC हर साल इस परीक्षा के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय विदेश सेवा जैसी सेवाओं के लिए उम्मीदवार चुनता है. ऐसे में परिणाम से जुड़ी किसी भी तरह की गलत जानकारी तेजी से फैल जाती है. आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद रैंक 301 को लेकर चल रहा भ्रम पूरी तरह खत्म हो गया है.