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अब बच्चे भी बुकर प्राइज से होंगे सम्मानित, विजेता को मिलेंगे 50,000 पाउंड

बुकर प्राइज से अब बच्चे भी सम्मानित होंगे. फाउंडेशन ने इसको लेकर घोषणा कर दी है, साथ ही नियम व शर्त भी बता दिए गए हैं. ऐसे बच्चे, जो कुछ असाधारण लिखते हैं, उनके लिए ये एक बड़ा मौका है विश्व स्तर पर प्रसिद्धि के साथ पुरुस्कार स्वरुप भारी-भरकम प्राइस मनी जीतने का भी.

Kanhaiya Kumar Jha
अब बच्चे भी बुकर प्राइज से होंगे सम्मानित, विजेता को मिलेंगे 50,000 पाउंड
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: बुकर प्राइज के बारे में आपने जरूर सुना होगा. दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कारों में गिने जाने वाले बुकर प्राइज को पाने की हसरत तमाम ऐसे लोगों की होती है, जो लेखन विधा से जुड़े हैं. बुकर प्राइज अबतक वयस्कों को ही मिलता रहा है, लेकिन अब इसका दायरा बड़ा होनेवाला है. अब सिर्फ वयस्कों को नहीं, बल्कि बच्चों को भी बुकर प्राइज से सम्मानित किया जाएगा.

दरअसल, तेजी से बदलते परिदृश्य में अब ऐसे लेखकों की भरमार आ गई है, जो उम्र से तो कच्चे होते हैं, लेकिन लेखन कला में इनका कोई सानी नहीं है, मतलब बिलकुल पके और मंझे हुए. ऐसे में अब बुकर प्राइज फाउंडेशन ने इस पुरुस्कार से सम्मानित होने के लिए क्राइटेरिया में बदलाव किया है और अब 8 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चे भी इस अवार्ड से सम्मानित हो सकेंगे. 

बच्चों के बुकर प्राइज से सम्मानित होने की शर्त क्या है?

8 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों के बुकर प्राइज से सम्मानित होने की शर्त यह है कि उसकी किताब अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित या अंग्रेजी में अनुवादित हो. साथ ही किताब का प्रकाशन यूके या आयरलैंड में हुआ होना चाहिए. फाउंडेशन का कहना है कि इस पहल का मकसद बच्चों में अच्छी किताबों के प्रति रुचि बढ़ाना और उनके साहित्यिक टैलेंट को सम्मान देना है.

जूरी में वयस्कों के साथ बच्चे भी होंगे शामिल

जो बच्चे, इस अवार्ड से सम्मानित होंगे, उन्हें पुरुस्कार स्वरुप 50,000 पाउंड (करीब 67,000 अमेरिकी डॉलर या लगभग 55 लाख रुपये) की राशि दी जाएगी. खास बात यह है कि इस अवॉर्ड की जूरी में बच्चे और वयस्क दोनों शामिल होंगे. यानी, बच्चों की दुनिया को बच्चे ही समझेंगे और बच्चे ही उनका आकलन भी करेंगे. यह कदम, बच्चों को साहित्यिक गतिविधि से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है. जूरी की अगुवाई करनेवाले ब्रिटेन के मशहूर लेखक और वर्तमान चिल्ड्रन्स लॉरेट फ्रैंक कॉटरेल बॉयस ने कहा कि 'अब होने वाला है असली धमाका. चलो चिल्लाने की शुरुआत करें!' बॉयस खुद एक ब्रिटिश स्क्रीनराइटर, नॉवेलिस्ट और एक्टर हैं, जो बच्चों के लिए लिखी गई कहानियों के लिए प्रसिद्ध हैं.

बच्चों को बुकर प्राइज देने की शुरुआत कब से होगी?

फाउंडेशन के अनुसार 2026 की शुरुआत में चिल्ड्रन्स बुकर प्राइज एंट्री के लिए खुलेगा. किताबों की समीक्षा और चयन की प्रक्रिया लगभग एक साल तक चलेगी, जिसके बाद पहला अवॉर्ड 2027 में दिया जाएगा. यह कदम न केवल बच्चों के लिए प्रेरणादायक होगा, बल्कि प्रकाशकों और लेखकों के लिए भी नए अवसर खोलेगा ताकि वे इस आयु वर्ग के लिए और बेहतर साहित्य तैयार करें.

बुकर प्राइज की स्थापना कब हुई थी?

बता दें कि बुकर प्राइज की स्थापना 1969 में हुई थी. यह पुरस्कार आज दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान माना जाता है. बुकर प्राइज उन लेखकों को दिया जाता है जिन्होंने अंग्रेजी या अनुवादित अंग्रेजी में कुछ असाधारण लिखा हो. सलमान रुश्दी, मार्गरेट एटवुड, इयान मैकएवन, अरुंधति रॉय और हिलारी मंटेल जैसे दिग्गज इस अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं. 

इस साल किसे मिला बुकर अवॉर्ड?

भारत के लिए भी बुकर अवॉर्ड का गहरा नाता रहा है. इस साल भारतीय लेखिका, वकील और एक्टिविस्ट बानू मुश्ताक ने अपनी किताब ‘हार्ट लैंप’ के लिए इंटरनेशनल बुकर प्राइज जीता है. ‘हार्ट लैंप’ कन्नड़ भाषा में लिखी गई पहली किताब है, जिसे बुकर प्राइज मिला है. इसे दीपा भष्ठी ने अंग्रेजी में अनुवाद किया है और वे इस सम्मान को पाने वाली पहली भारतीय ट्रांसलेटर बनी हैं.