नई दिल्ली: फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के सामने भरोसे और साझेदारी को लेकर भारत का दृष्टिकोण रखा. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक परस्पर जुडी हुई है, लेकिन देशों के बीच विश्वास की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है. प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक विकास और स्थिरता के लिए समानता पर आधारित सहयोग ही आगे का रास्ता है.
जी7 के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन आपसी भरोसे का संकट लगातार गहरा रहा है. उन्होंने कहा कि किसी भी साझेदारी की सफलता विश्वास पर निर्भर करती है और भविष्य का वैश्विक सहयोग भी इसी आधार पर आगे बढेगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को अब मदद देने और लेने वाले पुराने नजरिए से बाहर निकलना होगा. उनके अनुसार, देशों के बीच संबंध समानता, सम्मान और साझा हितों पर आधारित होने चाहिए. उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण केवल सहायता नहीं, बल्कि बराबरी की भागीदारी चाहता है और यही भविष्य की जरूरत भी है.
मोदी ने कहा कि भारत की विकास साझेदारियां आत्मनिर्भरता और क्षमता निर्माण पर आधारित हैं. भारत का प्रयास केवल परियोजनाएं खडी करना नहीं, बल्कि सहयोगी देशों को अपने विकास की क्षमता प्रदान करना है. उन्होंने कौशल विकास और संस्थागत मजबूती को टिकाऊ विकास का आधार बताया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ और एक पेड मां के नाम जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास वैश्विक कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.
सम्मेलन की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं से मुलाकात की. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बातचीत भी चर्चा का केंद्र रही. दोनों नेताओं ने कुछ समय तक बातचीत की और बाद में एक ही सत्र में साथ बैठे. सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, ऊर्जा और भू राजनीतिक चुनौतियों समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है.