Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली. निफ्टी 50 में 300 से ज्यादा अंकों की गिरावट के बीच बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ी है. हालांकि, बाजार के उतार-चढ़ाव का केवल एक ही कारण नहीं हो सकता है. डॉमेस्टिक इकोनॉमिक इंडीकेटर्स के साथ-साथ वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों की एक्टिविटीज भी मार्केट की दिशा को प्रभावित करती हैं.
निफ्टी में गिरावट के बीच करीब 22,800 का स्तर तकनीकी रूप से चर्चा में है. निवेशक और बाजार विशेषज्ञ ऐसे स्तरों को सपोर्ट जोन के तौर पर देखते हैं. अगर इंडेक्स इस स्तर के आसपास टिकता है तो बाजार में स्थिरता आने की संभावना पर नजर रहेगी, जबकि इसके नीचे कमजोरी बढ़ सकती है. इस साल जनवरी में निफ्टी ने 26,373.20 का रिकॉर्ड इंट्रा-डे स्तर बनाया था. NSE के आंकड़ों के मुताबिक यह 5 जनवरी 2026 को दर्ज हुआ था. मार्केट में इतने उथल-पुथल के क्या-क्या कारण हो सकते हैं.
बाजार में दबाव के बीच महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति भी निवेशकों के लिए चिंता का एक कारण बनी है. राज्य सरकार ने 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है, जो करीब 74 फीसदी तहसीलों के बराबर है. सरकार ने इसके लिए कम बारिश और लंबे समय तक सूखे जैसे हालात को आधार बनाया है. इसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ने की आशंका है. सोयाबीन, कपास, दालों और दूसरी खरीफ फसलों पर इसका असर पड़ सकता है. पानी और चारे की कमी भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है.
भारत अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज से जुड़ी अनिश्चितता के कारण तेल बाजार पर भी नजर बनी हुई है. महंगा कच्चा तेल कंपनियों की लागत और देश के व्यापार संतुलन को प्रभावित कर सकता है.
बाजार में गिरावट के दौरान FII यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री भी महत्वपूर्ण हो जाती है. वैश्विक अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड जैसे कारक विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं. जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकालते हैं तो बाजार पर अतिरिक्त बिकवाली का दबाव बन सकता है.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और महंगाई से जुड़े फैसलों का असर दुनिया के शेयर बाजारों पर पड़ता है. अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने की स्थिति में निवेशकों के लिए डॉलर आधारित सुरक्षित निवेश आकर्षक हो सकते हैं. इसका असर उभरते बाजारों, जिसमें भारत भी शामिल है, पर देखने को मिल सकता है.
शेयर बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर कोई फैसला लेने के बजाय निवेशकों को अपने निवेश की अवधि, जोखिम क्षमता और पोर्टफोलियो को ध्यान में रखना चाहिए. निफ्टी या सेंसेक्स की एक दिन की गिरावट से पूरे बाजार की भविष्य की दिशा तय नहीं होती.