मुंबई: इस साल भारतीय शेयर बाजार के लिए शुरुआत बेहद खराब रही है. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक बाजार से 533 अरब डॉलर की पूंजी गायब हो चुकी है. यह पिछले 15 साल की सबसे बड़ी एकतरफा गिरावट है. विदेशी निवेशक लगातार बिक रहे हैं, कंपनियों के नतीजे कमजोर आए हैं और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक अनिश्चितता पैदा कर रहा है. महंगे कच्चे तेल ने भारत जैसे तेल आयातक देश को दोहरी मार दी है. बाजार का मूड पूरी तरह खराब है और निवेशकों में डर का माहौल है.
साल की शुरुआत में भारत की कुल मार्केट कैप 5.3 ट्रिलियन डॉलर थी, जो अब घटकर 4.77 ट्रिलियन डॉलर रह गई है. यानी महज कुछ महीनों में 10 फीसदी की भारी गिरावट. यह नुकसान कई देशों के पूरे शेयर बाजार से भी ज्यादा है. मेक्सिको, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की पूरी मार्केट वैल्यू इससे कम है. चिली और कतर जैसे देशों के बाजार से तो यह लगभग दोगुना है.
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली सबसे बड़ा झटका रही है. कमजोर कॉरपोरेट नतीजे और टेक्नोलॉजी सेक्टर में कम एक्सपोजर ने भी दबाव बढ़ाया. पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव से वैश्विक बाजार हिल गए हैं. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है. ईरान की चेतावनी है कि हालात बिगड़े तो कीमत 200 डॉलर तक जा सकती है.
महंगा तेल भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है. हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से करंट अकाउंट डेफिसिट में 9 अरब डॉलर का इजाफा हो सकता है. इससे महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा. कई राज्यों में गैस की कमी की खबरें आई हैं. कुछ होटलों को सीमित सप्लाई के कारण बंद होना पड़ा है. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो रोजमर्रा की जिंदगी और कारोबार प्रभावित होंगे.
Sensex इस साल 10.8 फीसदी और Nifty 9.5 फीसदी गिर चुके हैं. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 7-9 फीसदी नीचे हैं. मॉर्गन स्टैनली ने भारत की रेटिंग घटाकर 'Equalweight' कर दी है. ब्रोकरेज का कहना है कि भू-राजनीतिक जोखिम और महंगे वैल्यूएशन से विदेशी निवेशक सतर्क रहेंगे. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घबराहट में बिकवाली न करें, बल्कि मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के लिए निवेश करें.