नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर अक्सर बहस होती है. कई लोग मानते हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हो जाए तो भारत में भी ईंधन तुरंत सस्ता हो जाना चाहिए. लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा जटिल है. पेट्रोल या डीजल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल की खरीद पर निर्भर नहीं करती. इसमें रिफाइनिंग, परिवहन, डीलर कमीशन, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स समेत कई चरण शामिल होते हैं.
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. इसके बाद तेल कंपनियां इसे रिफाइन करती हैं और पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) और कई अन्य पेट्रोलियम उत्पाद तैयार करती हैं. इस पूरी प्रक्रिया में तेल कंपनियों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों की भी अलग-अलग स्तर पर आय होती है.
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है. देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 से 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यह तेल मुख्य रूप से रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका जैसे देशों से आता है.
कच्चा तेल सीधे पेट्रोल पंप तक नहीं पहुंचता. पहले इसे रिफाइनरियों में भेजा जाता है, जहां आधुनिक तकनीक से अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं.
इस प्रक्रिया के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:-
सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) कई माध्यमों से कमाई करती हैं.
1. रिफाइनिंग मार्जिन
रिफाइनरी में कच्चे तेल से कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं. यदि किसी कंपनी ने 100 डॉलर का कच्चा तेल खरीदा और उससे बने उत्पाद 108 डॉलर में बिके, तो लगभग 8 डॉलर का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) प्राप्त हुआ. हालांकि यह मार्जिन अंतरराष्ट्रीय बाजार और उत्पादों की मांग के अनुसार बदलता रहता है.
2. मार्केटिंग मार्जिन
रिफाइनिंग के बाद ईंधन को डिपो और पेट्रोल पंप तक पहुंचाने तथा खुदरा बिक्री के दौरान कंपनियों को मार्केटिंग मार्जिन मिलता है.
3. अन्य पेट्रोलियम उत्पादों से कमाई
एक बैरल कच्चे तेल से सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं बनता. इससे कई अन्य उत्पाद भी तैयार होते हैं, जैसे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, ATF (हवाई जहाज का ईंधन), बिटुमेन, लुब्रिकेंट्स, पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक आदि. इन सभी उत्पादों की बिक्री से कंपनियों की आय बढ़ती है.
केंद्र सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों से कई स्रोतों से आय होती है.
| आय का स्रोत | विवरण |
|---|---|
| एक्साइज ड्यूटी | प्रति लीटर निर्धारित केंद्रीय कर |
| कॉर्पोरेट टैक्स | तेल कंपनियों के मुनाफे पर कर |
| डिविडेंड | सरकारी हिस्सेदारी वाली तेल कंपनियों से मिलने वाला लाभांश |
| अन्य शुल्क | समय-समय पर लागू विशेष कर या शुल्क |
वर्तमान व्यवस्था में केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर निश्चित एक्साइज ड्यूटी वसूलती है. इसकी दर समय-समय पर सरकार द्वारा संशोधित की जाती है.
हर राज्य पेट्रोल और डीजल पर वैट (VAT) लगाता है. इसकी दर सभी राज्यों में अलग-अलग होती है. यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग दिखाई देती हैं.
| मद | अनुमानित राशि (₹) | विवरण |
|---|---|---|
| कच्चे तेल की लागत | 40.00 | अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदा गया कच्चा तेल |
| रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग | 6.00 | कच्चे तेल को पेट्रोल में बदलने की लागत |
| मार्केटिंग व परिवहन | 4.00 | डिपो से पेट्रोल पंप तक पहुंचाने का खर्च |
| केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क (Excise Duty) | 20.00 | केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला कर |
| राज्य सरकार का VAT व अन्य कर | 25.00 | राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला कर (राज्य अनुसार अलग हो सकता है) |
| पेट्रोल पंप डीलर का कमीशन | 5.00 | डीलर को मिलने वाला कमीशन |
| कुल खुदरा मूल्य | 100.00 | उपभोक्ता द्वारा चुकाई गई अनुमानित कीमत |
नोट: यह केवल ₹100 प्रति लीटर पेट्रोल का एक अनुमानित उदाहरण है. वास्तविक लागत, केंद्र का उत्पाद शुल्क, राज्य का VAT और डीलर कमीशन समय तथा राज्य के अनुसार बदलते रहते हैं.
यह केवल एक उदाहरण है. वास्तविक आंकड़े कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत और संबंधित राज्य के टैक्स के अनुसार बदल सकते हैं.
| मद | अनुमानित हिस्सा (₹ प्रति लीटर) |
|---|---|
| कच्चा तेल | ₹36 से ₹40 |
| रिफाइनिंग और परिवहन | ₹8 से ₹10 |
| तेल कंपनी का मार्जिन | ₹3 से ₹5 |
| डीलर कमीशन | ₹3 से ₹4 |
| केंद्र सरकार का टैक्स | ₹18 से ₹20 |
| राज्य सरकार का VAT | ₹24 से ₹30 |
| संस्था | अनुमानित वार्षिक आय |
|---|---|
| केंद्र सरकार (पेट्रोलियम करों से) | लगभग ₹2 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ |
| सभी राज्य सरकारें (VAT से) | लगभग ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3.5 लाख करोड़ |
| प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ | बाजार की स्थिति के अनुसार लगभग ₹70 हजार करोड़ से ₹1.5 लाख करोड़ या अधिक |
| नोट | |
|---|---|
| महत्वपूर्ण जानकारी | उपरोक्त आंकड़े अनुमानित हैं। वास्तविक आय कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत, पेट्रोल की खपत, कर दरों और संबंधित वित्तीय वर्ष के अनुसार बदल सकती है। |
ऐसा हमेशा नहीं होता. इसकी कई वजहें होती हैं
इसी कारण कई बार कच्चे तेल की कीमत घटने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत बड़ी कमी नहीं दिखाई देती.