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Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा पर इन 6 मंदिरों के दर्शन से जुड़ी हैं खास मान्यताएं, कोई मांगता है घर तो कोई कारोबार की तरक्की

विश्वकर्मा पूजा के मौके पर देशभर में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है. इस दिन कारखानों, दफ्तरों और घरों में मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा करने की परंपरा है.

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Edited By: Reepu Kumari
Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा पर इन 6 मंदिरों के दर्शन से जुड़ी हैं खास मान्यताएं, कोई मांगता है घर तो कोई कारोबार की तरक्की
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: विश्वकर्मा पूजा इस साल 17 सितंबर को मनाई जा रही है. भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, निर्माण और वास्तुकला से जोड़कर देखा जाता है. इस अवसर पर देशभर में कारखानों, कार्यालयों और घरों में मशीनों, औजारों तथा वाहनों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा दिव्य वास्तुकार हैं. इसी आस्था के कारण उनसे जुड़े मंदिरों में भी विशेष पूजा होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान विश्वकर्मा के कई मंदिर हैं, जिनसे स्थानीय परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. कहीं मंदिर को प्राचीन माना जाता है तो कहीं भक्त अपने घर की इच्छा लेकर पहुंचते हैं. कुछ स्थानों पर कारीगर और शिल्प से जुड़े लोग विशेष पूजा करते हैं. असम, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान और पंजाब समेत कई जगहों पर स्थित इन मंदिरों में विश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष भीड़ देखने को मिलती है.

गुवाहाटी का मंदिर कामाख्या परिसर से जुड़ा है

असम के गुवाहाटी में स्थित विश्वकर्मा मंदिर को दुनिया का सबसे पुराना विश्वकर्मा मंदिर माना जाता है. यह मां कामाख्या देवी मंदिर के तल भाग में स्थित है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 1965 में कामाख्या मंदिर के पुजारियों ने महावीर प्रसाद के सहयोग से इसका निर्माण कराया था. हर साल 17 सितंबर को यहां विशेष पूजा होती है. पूर्वी राज्यों में विश्वकर्मा पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखा जाता है और इस मंदिर में भी श्रद्धालु पहुंचते हैं.

दिल्ली के मंदिर का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है

दिल्ली के पहाड़गंज में भगवान विश्वकर्मा का प्रसिद्ध मंदिर है. मान्यता है कि इसकी नींव पांडवों से जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि युधिष्ठिर के आग्रह पर इंद्रप्रस्थ के निर्माण के समय इस स्थान का इस्तेमाल मय दानव ने निर्माण कार्य के लिए किया था. मंदिर परिसर में एक पुराना गहरा कुआं और पीपल का पेड़ भी मौजूद है. विश्वकर्मा जयंती पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं.

मुंबई में अपना घर पाने की कामना लेकर पहुंचते हैं भक्त

मुंबई के कांदिवली ईस्ट स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर स्थानीय लोगों और कारीगरों के बीच आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां किराए के घर में रहने वाले कई लोग अपना मकान खरीदने या बनवाने की मन्नत लेकर पहुंचते हैं. लोहार, बढ़ई, इंजीनियर और औजारों से काम करने वाले लोग भी मंदिर में पूजा करते हैं. राजस्थान के जोधपुर के डांगियावास क्षेत्र में पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर है, जहां श्रद्धालु व्यवसाय में तरक्की और सफलता की कामना करते हैं.

फगवाड़ा से खरगोन तक अलग-अलग परंपराएं

पंजाब के फगवाड़ा में बंगा रोड, गोंसपुर स्थित सर्वशक्तिमान विश्वकर्मा मंदिर सफेद संगमरमर से बना है. इसका निर्माण 1909 में पंडित नत्थू राम धीमान ने शुरू कराया था. कपूरथला के महाराजा ने इसके लिए जमीन दान की थी और 1911 में मूर्ति स्थापित हुई. मध्य प्रदेश के खरगोन में स्थित मंदिर की खास परंपरा है. यहां साल में दो बार भगवान विश्वकर्मा का जन्मोत्सव मनाया जाता है. सागर के सदर क्षेत्र में भी प्रसिद्ध विश्वकर्मा मंदिर है.