गणेशोत्सव के दौरान भक्तों को सबसे ज्यादा इंतजार बप्पा की विदाई के दिन का रहता है. अलग-अलग परंपराओं के अनुसार गणपति विसर्जन डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें, सातवें या दसवें दिन किया जाता है. हालांकि, दस दिनों तक गणपति की स्थापना करने वाले अधिकांश परिवारों और सार्वजनिक पंडालों में अंतिम विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है.
साल 2026 में अनंत चतुर्दशी की तारीख को लेकर 24 और 25 सितंबर का भ्रम हो सकता है. इसकी वजह यह है कि चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात को शुरू होगी. पंचांग गणना के अनुसार इस बार अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन की मुख्य तारीख 25 सितंबर 2026 रहेगी.
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात करीब 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी. यह तिथि 25 सितंबर की रात करीब 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी.
24 सितंबर को सूर्योदय के समय त्रयोदशी तिथि होगी, जबकि 25 सितंबर को सूर्योदय चतुर्दशी तिथि में होगा. इसलिए उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा 25 सितंबर को की जाएगी. इसी दिन दसवें दिन का गणेश विसर्जन भी होगा.
स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण तिथि समाप्त होने के समय में अलग-अलग शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है. हालांकि, पर्व की मुख्य तारीख 25 सितंबर ही रहेगी.
नई दिल्ली की पंचांग गणना के अनुसार 25 सितंबर को गणेश विसर्जन के लिए कई शुभ चौघड़िया मिल रहे हैं.
सुबह: 6:11 बजे से 10:42 बजे तक.
दोपहर: 12:13 बजे से 1:43 बजे तक.
शाम: 4:44 बजे से 6:14 बजे तक.
रात: 9:14 बजे से 10:43 बजे तक.
गणेश विसर्जन से पहले घर में भगवान गणेश की सामान्य पूजा करें. बप्पा को दूर्वा, लाल फूल, मोदक और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद अर्पित करें. इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें. पूजा के दौरान हुई किसी भूल के लिए भगवान गणेश से क्षमा मांगें और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें. इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं.
घर में स्थापित छोटी मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन बाल्टी या किसी बड़े पात्र में किया जा सकता है. प्रतिमा के पूरी तरह घुलने के बाद उस पानी को पौधे या साफ मिट्टी में डालना पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जाता है.
गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला दस दिवसीय गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी पर पूरा होता है. इसी दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने और 14 गांठ वाला अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है. इस दिन एक तरफ भक्त गणपति बप्पा को भावुक विदाई देते हैं, वहीं दूसरी तरफ भगवान विष्णु से परिवार की सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना की जाती है.