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Garud Puran: मौत के बाद आत्मा कहां जाती है? गरुड़ पुराण में बताई गई 47 दिनों की रहस्यमयी यात्रा

मृत्यु को जीवन का अंतिम सत्य माना गया है, लेकिन हिंदू धार्मिक मान्यताओं में शरीर के बाद आत्मा की यात्रा का भी विस्तार से वर्णन मिलता है.

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Edited By: Reepu Kumari
Garud Puran: मौत के बाद आत्मा कहां जाती है? गरुड़ पुराण में बताई गई 47 दिनों की रहस्यमयी यात्रा
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: मृत्यु को लेकर मनुष्य के मन में हमेशा से कई सवाल रहे हैं. शरीर खत्म होने के बाद आत्मा का क्या होता है और वह कहां जाती है, ऐसे प्रश्नों का जवाब हिंदू धार्मिक ग्रंथों में अलग-अलग तरीके से मिलता है. भगवद्गीता में आत्मा को अमर बताया गया है, जबकि गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद जीवात्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन किया गया है. इसमें यमलोक तक पहुंचने के मार्ग और उससे जुड़ी मान्यताएं बताई गई हैं.

गरुड़ पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ को मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति और उसकी यात्रा के बारे में बताया था. मान्यता है कि अंतिम समय में व्यक्ति की आवाज कमजोर पड़ने लगती है और इंद्रियां धीरे-धीरे शिथिल होती हैं. इस अवस्था में उसे दिव्य दृष्टि मिलने की बात कही गई है. इसके बाद यमदूत आते हैं और जीवात्मा शरीर छोड़कर उनकी यात्रा पर निकलती है.

मृत्यु के बाद पीछे छूट जाता है अपना ही संसार

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरीर छोड़ने के बाद जीवात्मा को वापस उसी घर में लाया जाता है, जहां उसने देह त्यागी थी. वह अपने शरीर में लौटने का प्रयास करती है, लेकिन ऐसा नहीं कर पाती. इसके बाद वह अपने परिवार को अंतिम संस्कार करते हुए देखती है. गरुड़ पुराण की मान्यताओं में पुण्य कर्म करने वाली और पाप कर्म करने वाली आत्माओं की यात्रा अलग-अलग बताई गई है.

13 दिनों के कर्मकांड को माना गया है महत्वपूर्ण

हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद 13 दिनों तक अलग-अलग कर्मकांड किए जाते हैं. गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, पिंडदान और अन्य कर्मों से मृतक के सूक्ष्म शरीर को आगे की यात्रा के लिए शक्ति मिलने की बात कही गई है. इसके बाद आत्मा की यमलोक की ओर यात्रा आगे बढ़ती है, जिसमें उसे कई तरह की कठिनाइयों का सामना करने का वर्णन मिलता है.

वैतरणी नदी का रास्ता भी बताया गया है कठिन

गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी का उल्लेख यमलोक की यात्रा की बड़ी बाधाओं में किया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह नदी बेहद भयावह होती है और इसे पार करना आसान नहीं माना जाता. कहा जाता है कि गौसेवा या गाय से जुड़े पुण्य कर्म करने वाले व्यक्ति को इसे पार करने में सहायता मिलती है, जबकि पाप कर्मों वाली आत्मा को कठिनाई झेलनी पड़ती है.

यमलोक में कर्मों का हिसाब, फिर मिलता है फल

मान्यताओं के अनुसार, यमलोक पहुंचने के बाद जीवात्मा के कर्मों का लेखा-जोखा देखा जाता है. जीवन में किए गए कर्मों के आधार पर उसे आगे का फल मिलने की बात कही गई है. गरुड़ पुराण का यह वर्णन मनुष्य को यह संदेश देता है कि धन, रिश्ते और दूसरी सांसारिक वस्तुएं मृत्यु के बाद साथ नहीं जातीं. व्यक्ति के कर्म ही उसके साथ जाते हैं.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.