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कल है उत्पन्ना एकादशी, व्रत का फल चाहिए तो बिल्कुल न करें ये काम; जानें किन चीजों का रखें खास ध्यान

उत्पन्ना एकादशी 15 नवंबर 2025 को पड़ रही है और इसे मार्गशीर्ष की पहली एकादशी माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और एकादशी देवी की पूजा की जाती है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
Lord Vishnu India daily
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: मार्गशीर्ष माह की पहली एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है और इस वर्ष यह तिथि 15 नवंबर 2025 को पड़ रही है. हिंदू धर्म में इस एकादशी का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है क्योंकि इसी दिन से एकादशी व्रतों की शुरुआत मानी जाती है. देवउठनी एकादशी के बाद आने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु और एकादशी देवी की संयुक्त रूप से पूजा की जाती है.

मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और सत्कर्म करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है. लेकिन शास्त्रों में बताया गया है कि इस पवित्र दिन पर कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इनसे व्रत का फल नष्ट हो सकता है और दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है.

किन चीजों का रखें खास ध्यान?

उत्पन्ना एकादशी को शास्त्रों में अत्यंत शुभ और पवित्र तिथि कहा गया है. इस दिन मन और वचन को पवित्र रखने की विशेष सलाह दी गई है. माना जाता है कि झूठ बोलना, किसी को धोखा देना या छल-कपट का व्यवहार करना अत्यंत अशुभ माना जाता है. ऐसा करने से न केवल व्रत का महत्व कम होता है बल्कि भगवान विष्णु की कृपा भी दूर हो जाती है.

भोजन में इन चीजों को न करें शामिल

इसी तरह भोजन में भी सात्विकता बनाए रखना बहुत आवश्यक माना गया है. इस दिन लहसुन, प्याज, मांस और शराब जैसे तामसिक आहार का सेवन पूरी तरह वर्जित बताया गया है. ऐसा करने से व्रत की पवित्रता भंग होती है और शुभ फल प्राप्त नहीं होता है.

दान पुण्य का क्या महत्व?

एकादशी व्रत में मन को शांत रखना और गुस्से से दूर रहना भी जरूरी माना गया है. शास्त्रों में उल्लेख है कि क्रोध करने से व्रत का संपूर्ण पुण्य नष्ट हो जाता है. इसलिए इस दिन कटु वचन बोलने, दूसरों का अपमान करने या किसी के साथ बुरा व्यवहार करने से बचना चाहिए. इसके अलावा दान का भी उत्पन्ना एकादशी में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति घर के द्वार पर आता है या रास्ते में मिलता है तो अपनी क्षमता के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और व्रत का फल पूर्ण होता है.

चावल क्यों है निषिद्ध?

चावल का सेवन भी एकादशी के दिन निषिद्ध माना गया है. मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से व्रत का फल कम हो जाता है और शुभ कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है. इसलिए गलती से भी इस तिथि पर चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. आप द्वादशी के दिन सामान्य रूप से चावल खा सकते हैं. 

उत्पन्ना एकादशी का पालन पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सौभाग्य बढ़ता है. इस विशेष तिथि पर भक्त पूजन, ध्यान और उपवास रखकर अपने मन और शरीर को पवित्र बनाए रखने का संकल्प लेते हैं.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.