3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण और होलिका दहन का एक बड़ा और दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है. धर्म शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सीधा असर हमारी भावनाओं और मन पर पड़ता है. इससे आसपास नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. हालांकि, ग्रहण समाप्त होते ही वातावरण में फिर से सकारात्मक ऊर्जा का संचार शुरू हो जाता है. ऐसे में ग्रहण के तुरंत बाद शुद्धिकरण के कुछ विशेष उपाय करने से ग्रह दोष शांत होते हैं, कलह-क्लेश मिटता है और घर-परिवार में सुख-शांति व समृद्धि आती है. शास्त्रों के अनुसार, यह समय नई शुरुआत और शुद्धिकरण का सबसे अच्छा अवसर होता है, जिससे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
ग्रहण खत्म होते ही सबसे पहले पानी में गंगाजल या तुलसी के पत्ते डालकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय भगवान का स्मरण करें और अशुद्धि दूर होने की प्रार्थना करें. स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें. इससे शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर शुद्धि होती है और मन में शांति का संचार होता है.
स्नान के बाद घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, रसोई और बेडरूम समेत सभी कोनों में गंगाजल का छिड़काव करें. छिड़काव करते समय पवित्र नदियों का आह्वान करने वाले मंत्र 'ॐ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती. नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥' का जाप करें। यह उपाय घर की नकारात्मक ऊर्जा और कलह-क्लेश को तुरंत समाप्त कर देता है.
चंद्र ग्रहण के बाद चंद्रमा से जुड़े सफेद पदार्थों का दान बेहद पुण्यदायी माना गया है. जरूरतमंदों को चावल, दूध, दही या खीर का दान करने से मानसिक तनाव कम होता है. इससे घर में शीतलता और प्रेम बढ़ता है, साथ ही आर्थिक स्थिति में भी तेजी से सुधार आता है.
अपनी सामर्थ्य के अनुसार सफेद कपड़े, चांदी का सिक्का या कोई छोटा आभूषण दान करना चंद्र ग्रहण के बाद सबसे शुभ माना जाता है. दान करते समय भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का ध्यान करें. यह उपाय चंद्र दोष को शांत कर घर के सौभाग्य में वृद्धि करता है.
ग्रहण के बाद अन्न दान को सबसे बड़ा दान माना गया है. जरूरतमंद लोगों को खीर, मीठे चावल या सफेद रंग की मिठाई का दान करें और उन्हें भोजन कराएं. सच्चे मन और बिना किसी दिखावे के किया गया यह दान दरिद्रता को दूर करता है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होने देता.