साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण समाप्त हो चुका है. चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर शुरू हुआ और शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त हो गया. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण था, जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखी गई.
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का सूतक सुबह 9 बजकर 20 मिनट से प्रभावी हो गया था. इस दौरान कई लोगों ने धार्मिक नियमों का पालन किया और मंदिरों के कपाट भी कुछ समय के लिए बंद रखे गए. मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिसे सूतक काल कहा जाता है.
भारत के ज्यादातर इलाकों में चंद्र ग्रहण आंशिक रूप में नजर आया. वहीं, पश्चिमी भारत के कई क्षेत्रों में लोगों को प्रच्छाया चंद्र ग्रहण की झलक देखने को मिली. इसके अलावा पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में पूर्ण चंद्र ग्रहण स्पष्ट रूप से दिखाई दिया. इस तरह साल का पहला चंद्र ग्रहण संपन्न हो गया और आसमान में दिखे इस अनोखे दृश्य ने खगोल प्रेमियों को खास अनुभव दिया.
ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद घर की शुद्धि करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो और परिवार में शांति-समृद्धि बनी रहे. ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धि शुरू करने का सबसे अच्छा समय शाम 6:50 से 7:15 बजे के बीच है. सबसे पहले सभी परिवारजन स्नान करें. अगर संभव हो तो स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं. स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें. यह शरीर और मन की सफाई का पहला कदम है.
घर की शुद्धि के लिए मुख्य उपाय गंगाजल का छिड़काव है. एक लोटे में गंगाजल लें और कुशा या दूर्वा घास से घर के हर कोने, मुख्य द्वार, कमरों, रसोई और खासकर पूजा स्थल पर छिड़कें. इससे नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और घर में दिव्य ऊर्जा भर जाती है. इसके बाद घी का दीपक जलाएं. मुख्य द्वार पर, तुलसी के पास और पूजा घर में घी का दीपक लगाएं. अगरबत्ती या लोबान का धुआं पूरे घर में फैलाएं. दीपक को कम से कम एक घंटे तक जलने दें. कुछ लोग होलिका दहन की राख में घी मिलाकर दीपक जलाते हैं, जो लक्ष्मी जी की कृपा बढ़ाने वाला माना जाता है.
पूजा स्थल या मंदिर की विशेष सफाई जरूरी है. ग्रहण के दौरान मंदिर के पाट बंद रहते हैं. समाप्ति के बाद मूर्तियों पर गंगाजल चढ़ाएं, नए वस्त्र अर्पित करें और फूल-धूप-दीप से पूजा करें. अगर होलिका की राख उपलब्ध हो तो मूर्तियों पर तिलक लगाएं. इससे पूजा स्थल की ऊर्जा फिर से जागृत होती है. शुद्धि के बाद दान-पुण्य अवश्य करें. गरीबों को चावल, दूध, चीनी, घी, कपड़े या धन का दान दें.
यह ग्रहण के दोष से मुक्ति दिलाता है और पुण्य प्राप्ति का माध्यम बनता है. ये सरल लेकिन शास्त्रीय उपाय घर में सुख-शांति लाते हैं, नजर-दोष और नकारात्मकता दूर करते हैं. ग्रहण के बाद घर को साफ-सुथरा रखें, झाड़ू-पोछा करें (पानी में नमक डालकर) और परिवार के साथ प्रार्थना करें. ऐसे छोटे-छोटे प्रयास से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है.