मंगलवार, 3 मार्च को वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लगा है. दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से इसका स्पर्श काल शुरू हुआ, जिसे खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है. फाल्गुन मास की पहली पूर्णिमा पर लगने के कारण इस ग्रहण को विशेष माना जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र जाप और भगवान का स्मरण अत्यंत फलदायी होता है. खास तौर पर हनुमान चालीसा का पाठ इस समय बेहद प्रभावी माना गया है.
परंपराओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. इस अवधि में पूजा-पाठ, भोजन बनाना और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं. मंदिरों के पट भी बंद कर दिए जाते हैं. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक खगोलीय घटना है, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं में इसका गहरा महत्व बताया गया है.
धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो सकती है. ऐसे में मंत्र जाप और ध्यान करने से मन को स्थिरता मिलती है. हनुमान चालीसा का पाठ विशेष रूप से लाभकारी माना गया है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इससे भय और मानसिक अशांति दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
ग्रहण के स्पर्श काल से लेकर उसके समाप्त होने तक हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है. इसे सात या इक्कीस बार पढ़ना अधिक शुभ माना गया है. पाठ मन ही मन या धीमी आवाज में करना चाहिए. साफ और शांत स्थान पर बैठकर श्रद्धा के साथ पाठ करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं. ग्रहण के दौरान संयम और एकाग्रता बनाए रखना आवश्यक है.
ज्योतिष के अनुसार ग्रहण काल में किया गया जप-तप कई गुना फल देता है. मान्यता है कि राहु-केतु से जुड़े दोषों के प्रभाव को कम करने में भी यह सहायक हो सकता है. यदि मन अशांत हो या भय महसूस हो तो हनुमान चालीसा का पाठ आत्मविश्वास बढ़ाता है. इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई साधना मन को सुकून देती है.