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वर-वधू से नाग-नागिन की पूजा तक होती हैं ये खास रस्में, जानें वट सावित्री की अनोखी परंपराएं

वट सावित्री व्रत को लेकर बिहार में खास उत्साह है. इस पर्व में बरगद पूजा, वर-वधू बनाने, नाग-नागिन पूजा और पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं. चलिए जानते हैं क्या है परंपरा.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
वर-वधू से नाग-नागिन की पूजा तक होती हैं ये खास रस्में, जानें वट सावित्री की अनोखी परंपराएं
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: वट सावित्री व्रत को लेकर शहर से लेकर दूर-दराज के गांवों तक एक जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. सुबह से ही पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी सुहागिनें बरगद के पेड़ की पूजा की तैयारियों में व्यस्त हैं. उनके माथे पर सिंदूर की लंबी लकीर हाथों में पूजा की सामग्री से भरी टोकरियां और रंग-बिरंगे हाथ से बने पंखे इस त्योहार की खास पहचान बन गए हैं.

यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है. ज्येष्ठ महीने की तेज गर्मी के बीच मनाए जाने वाले इस अनुष्ठान में महिलाएं बांस या तार से बने हाथ के पंखों से अपने पतियों को हवा देने की परंपरा निभाती हैं. स्थानीय बोली में इन पंखों को बयान कहा जाता है.

पूजा की शुरुआत कैसे होती है?

पूजा के अनुष्ठान एक दिन पहले 'नहाय-खाय' की रस्म के साथ शुरू होते हैं. घरों में सात्विक भोजन तैयार किया जाता है. अरवा चावल, मूंग दाल, आलू और परवल की सब्जी, खीर, ठेकुआ, गुलगुला, और कई अन्य पारंपरिक मिठाइयां जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं. व्रत के दौरान महिलाएं मुख्य रूप से मीठे व्यंजन ही खाती हैं.

मिथिला क्षेत्र में उन महिलाओं के लिए विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं जो पहली बार यह व्रत रख रही होती हैं. कई महिलाएं यह व्रत अपने मायके में रहकर करना पसंद करती हैं. ससुराल पक्ष से साड़ी, सुहाग की निशानियां, फल और नाग-नागिन की मिट्टी की मूर्तियां जैसे उपहार भेजे जाते हैं.

किन चीजों का विशेष महत्व है?

शुभ गीत गाते हुए, महिलाएं अपने घरों से पूजा स्थल की ओर जाती हैं और बरगद के पेड़ को अपनी पूजा सामग्री अर्पित करती हैं. सात अलग-अलग रंगों में बुनी हुई टोकरियां और ऊपर बताए गए विशेष पंखे भी इन अनुष्ठानों के दौरान बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

इस व्रत से जुड़ी सबसे अनोखी रस्मों में से एक है, कपड़े और रुई का इस्तेमाल करके दूल्हा-दुल्हन की आकृतियां बनाना. महिलाएं सावित्री और सत्यवान के प्रतीक के रूप में इन आकृतियों को बनाती हैं और उनके लिए एक प्रतीकात्मक विवाह समारोह आयोजित करती हैं.

'मैनापट' पौधे से जुड़ी परंपरा क्या है?

एक और विशिष्ट परंपरा 'मैनापट' पौधे के इर्द-गिर्द घूमती है. नाग-नागिन की मिट्टी की आकृतियों को इसके पत्तों पर रखा जाता है और उन्हें दूध चढ़ाया जाता है. यह प्रथा प्रकृति की पूजा में गहराई से निहित है और सावित्री तथा सत्यवान की कथा से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है.

महिलाएं बरगद के पत्तों का उपयोग करके मुकुट और सजावटी वस्तुएं भी बनाती हैं. पूजा के बाद, महिलाएं अपने पतियों को तिलक लगाती हैं, उन्हें पंखा झलती हैं और उनका आशीर्वाद लेती हैं. इस त्योहार को परंपरा, आस्था और पारिवारिक बंधनों का एक अनूठा संगम माना जाता है.