उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में मतांतरण से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. हाल के महीनों में सामने आए कई मामलों के बाद अब प्रशासन को यह सूचना मिली है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों ने सरकारी नौकरी मिलने के बाद धर्म परिवर्तन किया है. इस जानकारी के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और सभी तहसीलदारों को ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए हैं. प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में सूचना सही पाई जाती है तो संबंधित मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने बताया कि जिले के सभी तहसीलदारों को पत्र भेजा गया है. उनसे कहा गया है कि ऐसे सरकारी कर्मचारियों की पहचान की जाए जिन्होंने पहले सरकारी नौकरी प्राप्त की और उसके बाद मतांतरण किया हो. प्रशासन के अनुसार फिलहाल प्राप्त सूचनाओं की सत्यता की जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
ऊधम सिंह नगर जिले के नानकमत्ता और गदरपुर क्षेत्र में पिछले तीन महीनों के दौरान मतांतरण से जुड़े कई मामले सामने आए हैं. कुछ गांवों में प्रार्थना सभाओं के आयोजन की सूचना भी प्रशासन को मिली थी, जिसके बाद इन मामलों की जांच शुरू की गई. इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने पूरे जिले में ऐसे मामलों पर नजर और सख्त कर दी है.
सबसे अधिक चर्चा चकरपुर गांव के एक मामले की हुई थी. आरोप था कि एक युवक ने प्रेम विवाह से पहले युवती के सामने धर्म परिवर्तन की शर्त रखी. युवती के मतांतरण के बाद दोनों की शादी हुई. बाद में आरोप लगा कि युवक ने युवती के परिवार पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और ऐसा नहीं करने पर तलाक देने की धमकी दी. मामले में मारपीट की शिकायत भी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी.
गदरपुर क्षेत्र में राजन नाम के एक व्यक्ति द्वारा अपना नाम बदलकर राजन मसीह रखने का मामला भी काफी चर्चा में रहा. प्रशासनिक जांच में पता चला कि संबंधित व्यक्ति अनुसूचित जाति वर्ग से था और आरक्षण का लाभ ले रहा था. सुनवाई के दौरान संबंधित व्यक्ति ने ईसाई धर्म अपनाने की बात स्वीकार की. इसके बाद जांच के आधार पर प्रशासन ने उसे मिल रहे आरक्षण संबंधी लाभ को समाप्त कर दिया.