नई दिल्ली: इस्लाम का सबसे पवित्र महीना रमजान हर साल चंद्रमा की रौशनी से शुरू होता है. भारत में बुधवार शाम को चांद नजर आने के बाद 19 फरवरी से रमजान की शुरुआत हुई. रोजेदार सुबह-सवेरे सहरी करके दिनभर खाने-पीने से परहेज करते हैं और शाम को इफ्तार के साथ रोजा खोलते हैं. यह महीना सिर्फ भूख-प्यास का नहीं, बल्कि आत्म-संयम, नेकी और अल्लाह से जुड़ाव का भी है. परिवार और समाज में एकता की भावना बढ़ती है, दान-पुण्य बढ़ता है और दुआओं का असर माना जाता है. आज छठा रोजा है, जो ईमानदारी की याद दिलाता है.
रमजान सिर्फ रोजा रखने का महीना नहीं है. यह आत्म-नियंत्रण सिखाता है, जहां इंसान अपनी इच्छाओं पर काबू पाकर अल्लाह की इबादत में डूब जाता है. सहरी और इफ्तार के वक्त परिवार इकट्ठा होता है, जो रिश्तों को मजबूत बनाता है. लोग गरीबों को खाना बांटते हैं, तरावीह की नमाज पढ़ते हैं और कुरान की तिलावत करते हैं. तीन अशरे में बांटा गया यह महीना रहमत, बरकत और मगफिरत लाता है. रोजेदारों को हर अच्छे काम का बड़ा सवाब मिलता है.
छठा रोजा अल्लाह के प्रति निष्ठा, धैर्य और आज्ञाकारिता पर जोर देता है. कुरान के 25वें पारा, सूरह अश-शूरा (42:43) में कहा गया है: और जो कोई धैर्यवान और क्षमाशील है, वह निश्चय ही दृढ़ संकल्प की आवश्यकता वाले मामलों में से है.
यह आयत धैर्य और क्षमा के गुणों पर प्रकाश डालती है, जो एक विश्वासी के आध्यात्मिक स्तर को ऊंचा उठाते हैं. पूर्ण ईमानदारी, संयम और भक्ति के साथ रखा गया उपवास ही सच्चे रोजादार (रोजा रखने वाले) की पहचान है. रमज़ान के दौरान, जो लोग धैर्य, करुणा और सत्यनिष्ठा का पालन करते हैं, उन्हें अल्लाह की दया और आशीर्वाद प्राप्त होता है.
आज रमजान का छठा दिन है और इफ्तार का समय शहरों के अनुसार अलग है. नई दिल्ली में शाम 6:18 बजे, लखनऊ में 6:05 बजे, हैदराबाद में 6:22 बजे, बेंगलुरु में 6:28 बजे और पुणे में 6:40 बजे रोजा खुलेगा. चेन्नई में 6:17 बजे, गुवाहाटी में 5:22 बजे और कोलकाता में 5:39 बजे इफ्तार होगा. मुंबई में सबसे देर से 6:43 बजे इफ्तार होगा. ये समय सूर्यास्त पर आधारित हैं और स्थानीय मस्जिदों से भी पुष्टि कर लें.
रमजान में सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी है. सहरी में पौष्टिक भोजन लें, ज्यादा पानी पिएं और नमक-चीनी संतुलित रखें. इफ्तार खजूर और पानी से शुरू करें, जैसा सुन्नत है. गर्मी में थकान से बचने के लिए हल्का काम करें और ज्यादा इबादत में समय बिताएं. दान और सदका बढ़ाएं, क्योंकि रमजान में हर नेकी का सवाब 70 गुना मिलता है. परिवार के साथ वक्त बिताकर खुशियां बांटें.
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