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होली पर 100 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, लगेगा चंद्र ग्रहण; जानें सूतक काल में कैसे की जाएगी होलिका दहन

इस साल 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लगेगा, जो लगभग 100 वर्ष बाद होली के साथ ऐसा संयोग बना रहा है. ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा, जबकि सूतक काल सुबह से शुरू हो जाएगा.

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Edited By: Reepu Kumari
होली पर 100 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, लगेगा चंद्र ग्रहण; जानें सूतक काल में कैसे की जाएगी होलिका दहन
Courtesy: ANI

नई दिल्ली: हर साल होली का इंतजार उत्साह से किया जाता है. यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत, भाईचारे और रंगों की मस्ती का प्रतीक है. लेकिन 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा पर एक खास खगोलीय घटना जुड़ रही है – चंद्र ग्रहण. करीब 100 साल बाद ऐसा हो रहा है कि होलिका दहन और रंग वाली होली दोनों पर ग्रहण का प्रभाव रहेगा. ज्योतिष के नियमों से सूतक काल लगने से धार्मिक कार्यों में रोक लग जाती है. ऐसे में लोग चिंतित हैं कि पूजा, दहन और उत्सव कैसे मनाएं. हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित प्रतीक मिश्र से बात कर इस उलझन को सुलझाया गया है.

ग्रहण का समय और प्रभाव

3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे तक चलेगा. भारत के कई हिस्सों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों में चंद्रोदय के समय यह 30-35 मिनट तक दिखेगा. ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जो पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों पर रोक लगाता है. मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान वर्जित माने जाते हैं.

होलिका दहन की उलझन और समाधान

फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5:56 बजे से शुरू होकर 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी. 2 मार्च को भद्रा का प्रभाव रहेगा, जबकि 3 मार्च को ग्रहण और सूतक है. पंडित प्रतीक मिश्र बताते हैं कि होलिका दहन भद्रा और सूतक से मुक्त समय में होता है, क्योंकि यह महिलाओं द्वारा बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है. प्रमुख पंचांगों के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद प्रदोष काल में दहन सुरक्षित होगा, भले पूर्णिमा तिथि खत्म हो जाए.

पूजन और होली मनाने का तरीका

होली का पूजन महिलाओं को 2 मार्च को ही करना चाहिए, क्योंकि 3 मार्च सुबह 6:20 बजे से सूतक शुरू हो जाएगा. दहन के लिए 3 मार्च शाम ग्रहण के बाद का समय उचित रहेगा. कुछ पंचांग भद्रा में भी दहन की अनुमति देते हैं, लेकिन सुरक्षित विकल्प ग्रहणोपरांत है. पंडित जी कहते हैं कि ऐसी स्थिति दुर्लभ है और इससे दोष नहीं लगता, बस समय का ध्यान रखें.

उपाय और सकारात्मक दृष्टिकोण

ग्रहण के समय घर में शांति बनाए रखें, नकारात्मक विचारों से दूर रहें. होलिका दहन के बाद रंग खेलते समय परिवार में कलह दूर करने के लिए सरसों का तेल या काले तिल दान करें. बुरी नजर से बचाव के लिए नींबू-मिर्च की माला घर के दरवाजे पर लगाएं. यह संयोग चुनौतीपूर्ण लगे, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से यह सकारात्मक बदलाव ला सकता है. त्योहार का आनंद लें, नियमों का पालन करते हुए.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.

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