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48 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करने पर नहीं देना होगा एक्सट्रा चार्ज, DGCA ने दी बड़ी राहत; मेडिकल इमरजेंसी पर भी आसान हुआ रिफंड

DGCA ने नई रिफंड नीति लागू की है. अब यात्री 48 घंटे के भीतर बिना शुल्क टिकट रद्द या संशोधित कर सकेंगे, बशर्ते तय समयसीमा का पालन हो. नाम सुधार, एजेंट बुकिंग और मेडिकल इमरजेंसी के नियम भी सरल किए गए हैं.

Anuj
Edited By: Anuj
48 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करने पर नहीं देना होगा एक्सट्रा चार्ज, DGCA ने दी बड़ी राहत; मेडिकल इमरजेंसी पर भी आसान हुआ रिफंड
Courtesy: Chat GPT

नई दिल्ली: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. देश के विमानन नियामक Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने 24 फरवरी को संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स जारी करते हुए टिकट रिफंड और कैंसिलेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है.

यह फैसला 2025 के आखिर में हुई यात्रा अव्यवस्थाओं और रिफंड में देरी की बढ़ती शिकायतों के बाद लिया गया. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइंस को भुगतान वापसी के लिए सख्त समयसीमा तय करने के निर्देश दिए थे.

48 घंटे की विशेष 'लुक-इन' अवधि

नई नीति के तहत जो यात्री सीधे एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट से टिकट बुक करेंगे, उन्हें 48 घंटे की विशेष 'लुक-इन' अवधि मिलेगी. इस दौरान वे बिना किसी अतिरिक्त सेवा शुल्क या कैंसिलेशन फीस के टिकट रद्द या यात्रा विवरण में बदलाव कर सकेंगे. हालांकि, यह सुविधा कुछ शर्तों के साथ लागू होगी और सभी बुकिंग पर स्वतः लागू नहीं होगी.

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए शर्तें

घरेलू उड़ानों के मामले में टिकट निर्धारित प्रस्थान तिथि से कम से कम पांच दिन पहले बुक किया गया होना चाहिए. वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए यह अवधि 15 दिन पहले की बुकिंग पर लागू होगी. यदि यात्री इन शर्तों को पूरा करते हैं, तो 48 घंटे के भीतर किए गए बदलाव पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.

DGCA ने क्या कहा?

DGCA ने यह भी स्पष्ट किया है कि टिकट में टाइपिंग की गलती सुधारने पर एयरलाइन कोई शुल्क नहीं लेगी, बशर्ते 24 घंटे के भीतर त्रुटि की सूचना दी जाए और टिकट सीधे एयरलाइन पोर्टल से खरीदा गया हो. इसके अलावा यदि टिकट किसी ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल से लिया गया है, तो रिफंड की जिम्मेदारी एयरलाइन की होगी. सभी भुगतान 14 कार्य दिवस के भीतर लौटाने होंगे.

मेडिकल इमरजेंसी में राहत

संशोधित नियमों में मेडिकल आपात स्थिति के मामलों को भी शामिल किया गया है. यदि कोई यात्री स्वास्थ्य संकट के कारण यात्रा नहीं कर पाता और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो एयरलाइन को पूरा रिफंड या भविष्य की यात्रा के लिए क्रेडिट शेल देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. यह कदम भारत को यूरोप और अमेरिका जैसे बाजारों में लागू उपभोक्ता संरक्षण मानकों के करीब लाता है.