गणपति की विदाई से पहले घर में विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है. सबसे पहले भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने पूजा की तैयारी करें और उन्हें तिलक लगाएं. इसके बाद दूर्वा, फूल और माला अर्पित करें. दीपक जलाकर गणपति बप्पा को मोदक या किसी मिठाई का भोग लगाएं.
पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ गणेश जी की आरती करें. आरती के दौरान और इसके बाद परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करें. पूजा के दौरान जाने-अनजाने हुई किसी भूल के लिए भगवान गणेश से क्षमा मांगना भी परंपरा का हिस्सा माना जाता है.
आरती समाप्त होने के बाद गणेश प्रतिमा को पूरे सम्मान के साथ विसर्जन स्थल तक ले जाएं. इस दौरान भक्त गणपति बप्पा मोरया और अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारे लगाते हुए बप्पा को विदा कर सकते हैं. विसर्जन स्थल पर पहुंचने के बाद पहले गणेश जी की एक बार फिर आरती करें. इसके बाद श्रद्धा के साथ प्रतिमा का विसर्जन करें. कई परिवारों में विसर्जन के समय गणेश जी के साथ भोजन रखने की परंपरा भी है. इसके लिए लाल कपड़े की एक छोटी पोटली में चावल, पंचमेवा और मिठाई रखकर प्रतिमा के साथ अर्पित किया जाता है.
गणेश विसर्जन के लिए दिन में अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं. सुबह विसर्जन करने वाले श्रद्धालु 6:11 बजे से 10:42 बजे के बीच यह अनुष्ठान कर सकते हैं. अगर सुबह का समय सुविधाजनक नहीं है तो दोपहर में भी विसर्जन किया जा सकता है. इसके लिए 12:13 बजे से 1:43 बजे तक का समय बताया गया है. इसके अलावा शाम को 4:44 बजे से 6:14 बजे के बीच भी गणपति विसर्जन किया जा सकता है.
गणपति विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक विदाई का अवसर माना जाता है. इसलिए विसर्जन के दौरान भक्तों को भक्ति और श्रद्धा का भाव बनाए रखना चाहिए. बप्पा को विदा करते समय परिवार के लिए सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें. साथ ही भगवान गणेश से अगले वर्ष फिर घर आने की कामना की जाती है. इसी भाव के साथ गणेश उत्सव का समापन होता है और भक्त अगले साल बप्पा के फिर आने की प्रतीक्षा करते हैं.