नई दिल्ली: एक स्थानीय रेस्टोरेंट जैसा दिखने वाली जगह पर 1977 का बॉलीवुड गाना 'बंबई से आया मेरा दोस्त, दोस्त को सलाम करो' गूंज रहा है, जहां अग्रवाल परिवार पुणे पोर्श केस में सुप्रीम कोर्ट के जमानत के आदेश का जश्न मना रहा है. विशाल अग्रवाल उस नाबालिग के पिता जिस पर मई 2024 में पुणे में शराब के नशे में पोर्श कार चलाने का आरोप है.
जिससे दो इंजीनियरों की मौत हो गई थी. उसको 10 मार्च को जमानत मिल गई. एक वीडियो जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह जमानत के आदेश के कुछ दिनों बाद का है, उसमें विशाल अग्रवाल को दोस्तों और परिवार के साथ जश्न मनाते हुए दिखाया गया है.
2 years after the Pune Porsche incident that killed techies Aneesh & Ashwini, here’s how the family responsible for the deaths is celebrating.
— Shiv Aroor (@ShivAroor) May 27, 2026
ALL accused, including the shameless Agarwal family, out on bail.
Zero remorse. Zero guilt.
Via @ndtvindia pic.twitter.com/Qv2pndDukw
अब वायरल हो रहे एक वीडियो में अग्रवाल अपनी पत्नी और बेटे के साथ नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं. उनके गले में दो मालाएं हैं. एक गुलाबी फूलों की और दूसरी नोटों से बनी हुई. जब बैंड लाइव परफॉर्म कर रहा होता है, तो उनका बेटा उन्हें ऊपर उठा लेता है और परिवार इस जीत का जश्न मनाता है.
उनकी पत्नी भी अपने गले में नोटों की माला पहने नाचती हुई दिखाई देती हैं. वीडियो में बाद में अग्रवाल को एक और आदमी ऊपर उठाते हुए दिखाई देता है, जबकि उनका बेटा उनकी पत्नी को ऊपर उठाता है. वे सब मिलकर नाचते हैं, हंसते हैं और जश्न मनाते हैं. इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों में गुस्सा भड़का दिया है.
अग्रवाल और उनकी पत्नी को कथित तौर पर अपने बेटे के खून के नमूनों में हेरफेर करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, ताकि यह साबित किया जा सके कि घटना के समय वह नशे में नहीं था. कथित तौर पर उसने अपने ड्राइवर पर दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने के लिए दबाव डालने की कोशिश की थी. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने 10 मार्च को अग्रवाल को जमानत दे दी.
पीठ ने आदेश दिया, 'हम यह नोट करते हैं कि अपीलकर्ता पिछले 22 महीनों से जेल में है. अपीलकर्ता ने जमानत के लिए एक मजबूत आधार पेश किया है. जमानत उन शर्तों और नियमों के अधीन दी जाती है जो ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए जाएंगे.' हालांकि शीर्ष अदालत ने अग्रवाल को इस मामले में किसी भी गवाह से संपर्क करने से रोक दिया है.