दिल्ली के कनॉट प्लेस से सामने आए एक वीडियो ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है. वीडियो में एक छोटा बच्चा फुटपाथ पर आराम कर रहे आवारा कुत्ते पर पत्थर फेंकता दिखाई देता है. इस घटना के बाद लोगों ने केवल बच्चे के व्यवहार पर ही नहीं, बल्कि उसके साथ मौजूद बड़ों की प्रतिक्रिया उसकी परवरिश पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग मान रहे हैं कि बच्चों में दया, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की सीख परिवार से ही शुरू होती है.
वायरल वीडियो में एक आवारा कुत्ता सड़क किनारे शांत बैठा दिखाई देता है. तभी वहां से गुजर रहा एक बच्चा अचानक पत्थर उठाकर उसकी ओर फेंक देता है. पत्थर लगते ही कुत्ता घबराकर उठ जाता है, जबकि बच्चा आगे बढ़ जाता है. वीडियो में मौजूद बड़े लोग भी बिना किसी हस्तक्षेप के वहां से निकलते नजर आते हैं, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई.
Look at this innocent community dog, peacefully sleeping and posing no threat to anyone, yet this child walks up and hits him.
— Vidit Sharma 🇮🇳 (@TheViditsharma) July 22, 2026
If you ask who is at fault here, it is not the child alone. The bigger responsibility lies with the parents or guardians who watched it happen, smiled,… pic.twitter.com/c6UbGXTJ0d
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हजारों प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई लोगों ने कहा कि बच्चे का व्यवहार उसके आसपास के माहौल से प्रभावित होता है. कुछ उपयोगकर्ताओं का मानना है कि ऐसी घटनाओं पर तुरंत समझाना जरूरी होता है. लोगों ने इसे बच्चों में सही संस्कार और जिम्मेदारी सिखाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया.
पशु कल्याण से जुड़े लोगों का कहना है कि बच्चों को जानवरों के प्रति दयालु व्यवहार सिखाने से उनमें सहानुभूति विकसित होती है. विशेषज्ञों के अनुसार जानवर भी दर्द, डर और तनाव महसूस करते हैं. इसलिए बचपन से ही बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि किसी भी जीव को बिना कारण नुकसान पहुंचाना गलत है.
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरु हो गई है. कई लोग बच्चे की परवरिश पर सवाल खड़े कर रहे हैं. इतना ही उनमें से कुछ का तो कहना है कि इसमें बच्चे की गलती नहीं है बल्कि इसमें बड़ों की गलति है जोकि बच्चों को जानवरों के प्रति संवेदनशीलता नहीं सिखाते हैं.
लोगों का कहना है कि माता पिता को बच्चों की गलत हरकतों को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें सही और गलत का अंतर समझाना चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन में दी गई ऐसी सीख बच्चों को संवेदनशील, जिम्मेदार और बेहतर नागरिक बनने में मदद करती है.