नई दिल्ली: दुनिया में मौसम के कई ऐसे रहस्य हैं, जो पहली नजर में किसी चमत्कार से कम नहीं लगते. इन्हीं में से एक है रोज लगभग एक ही समय पर होने वाली बारिश. खासकर भूमध्य रेखा के आसपास के कुछ इलाकों में शाम करीब 4 बजे अचानक घने बादल छा जाते हैं और तेज बारिश शुरू हो जाती है. यह घटना लंबे समय से लोगों को हैरान करती रही है. हालांकि, इस बारिश के पीछे कोई रहस्य या अलौकिक शक्ति नहीं, बल्कि प्रकृति का बेहद सटीक वैज्ञानिक संतुलन काम करता है. सूरज की गर्मी, हवा में मौजूद नमी और बादलों के बनने की प्रक्रिया हर दिन लगभग एक जैसी परिस्थितियां तैयार करती है. यही वजह है कि इस घटना को मौसम विज्ञान में विशेष महत्व दिया जाता है.
भूमध्य रेखा यानी इक्वेटर पर पूरे साल सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं. इससे दिनभर सतह तेजी से गर्म होती है. आसपास मौजूद महासागर, नदियां और घने जंगल वातावरण में लगातार नमी बनाए रखते हैं. तेज गर्मी के कारण पानी तेजी से भाप में बदलता है और हवा में नमी की मात्रा लगातार बढ़ती जाती है. यही प्रक्रिया आगे चलकर बारिश की नींव तैयार करती है.
सुबह से दोपहर तक सूर्य की गर्मी के कारण पानी का वाष्पीकरण यानी Evaporation होता रहता है. गर्म और नम हवा हल्की होने के कारण ऊपर उठती है. ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तापमान कम होने से यह हवा ठंडी होने लगती है. इसके बाद जलवाष्प छोटी छोटी बूंदों में बदल जाती है. इस प्रक्रिया को Condensation कहा जाता है और यहीं से बादलों का निर्माण शुरू होता है.
दोपहर 3 से 5 बजे के बीच बादलों में मौजूद जलकण लगातार बड़े और भारी होते जाते हैं. लगभग शाम 4 बजे तक इन बूंदों का वजन इतना बढ़ जाता है कि वे हवा में टिक नहीं पातीं और तेज बारिश शुरू हो जाती है. इसी नियमित समय पर होने वाली वर्षा को वैज्ञानिक '4 O'Clock Rain' के नाम से जानते हैं.
यह प्राकृतिक घटना मुख्य रूप से भूमध्य रेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों में देखने को मिलती है. कांगो बेसिन, अमेजन वर्षावन और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ द्वीपों में यह पैटर्न काफी सामान्य माना जाता है. इन इलाकों के लोग मौसम की इस नियमित प्रकृति के अनुसार अपनी दैनिक गतिविधियां भी तय करते हैं. भूमध्य रेखा (Equator) के आसपास दुनिया के 13 प्रमुख देश स्थित हैं.
इनमें दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर, कोलंबिया और ब्राजील, अफ्रीका के साओ टोमे एंड प्रिंसिपे, गैबॉन, कांगो गणराज्य, लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो, युगांडा, केन्या और सोमालिया, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के मालदीव, इंडोनेशिया और किरीबाती शामिल हैं. इन देशों में सालभर सूर्य की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं, इसलिए यहां तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहता है और कई क्षेत्रों में नियमित रूप से संवहनीय (Convectional) वर्षा देखने को मिलती है.
मौसम वैज्ञानिक इस प्रकार की वर्षा को संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall) कहते हैं. इसमें धरती की सतह गर्म होने से गर्म और नम हवा तेजी से ऊपर उठती है और बादलों का निर्माण करती है. जब बादलों में पर्याप्त नमी जमा हो जाती है, तो तेज बारिश होती है. यह पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक ऊर्जा संतुलन का हिस्सा है और मौसम विज्ञान के सबसे सटीक उदाहरणों में गिनी जाती है.
'4 O'Clock Rain' यह साबित करती है कि प्रकृति अपने नियमों के अनुसार बेहद व्यवस्थित ढंग से काम करती है. भूमध्य रेखा के आसपास हर दिन बनने वाली लगभग समान मौसमीय परिस्थितियां इस बारिश को नियमित बनाती हैं. इसलिए यह घटना किसी रहस्य से ज्यादा पृथ्वी के मौसम तंत्र और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का शानदार उदाहरण मानी जाती है.