Monkeys Geometric Skills: क्या गणित और ज्योमेट्री सिर्फ इंसानों की खासियत है? एक नई रिसर्च ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है. अमेरिका की कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि बंदरों में भी ज्योमेट्री समझने की क्षमता इंसानी बच्चों जितनी ही होती है. यह खुलासा देखकर वैज्ञानिक खुद हैरान रह गए.
रिसर्च टीम ने आठ वयस्क बंदरों पर परीक्षण किया. इनमें चार मैकाक और चार बबून शामिल थे. साथ ही 55 छोटे बच्चों को भी चुना गया, जिनकी उम्र 3 से 6 साल के बीच थी. इसके अलावा बोलीविया के स्वदेशी त्सिमाने समुदाय के लोगों को भी शामिल किया गया, जिन्होंने कभी स्कूल नहीं देखा और औपचारिक शिक्षा नहीं ली है.
सबको एक सरल टचस्क्रीन गेम खेलने को दिया गया. गेम में अलग-अलग ज्योमेट्री आकृतियां दिखाई जाती थीं और उन्हें सही पहचानना होता था. नतीजे चौंकाने वाले थे. बंदर और बच्चे दोनों ने लगभग एक समान प्रदर्शन किया. बंदर बिना किसी ट्रेनिंग के आकृतियों को आसानी से पहचान लेते थे, ठीक वैसे जैसे छोटे बच्चे करते हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह क्षमता जन्मजात है. यानी गणित की बुनियादी समझ हमारे दिमाग में पहले से ही मौजूद होती है. इसे स्कूल या पढ़ाई से सीखने की जरूरत नहीं पड़ती. त्सिमाने लोगों के नतीजे भी इसी बात की पुष्टि करते हैं. वे लोग जंगल में रहते हैं और आधुनिक शिक्षा से दूर हैं, फिर भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया.
इस अध्ययन से पता चलता है कि विकास की प्रक्रिया में गणितीय सोच बहुत पहले विकसित हो चुकी है. बंदर हमारे सबसे करीबी जीवों में से हैं. इनकी सोच का अध्ययन करके वैज्ञानिक मानव दिमाग को बेहतर समझ पा रहे हैं.
इससे यह साबित होता है कि गणित सिर्फ पढ़ाई का विषय नहीं, बल्कि प्राकृतिक क्षमता है. बच्चों की पढ़ाई के तरीकों में बदलाव लाने में मदद मिल सकती है. जानवरों की बुद्धिमत्ता को समझने का नया रास्ता खुला है. रिसर्च टीम के अनुसार बंदर इतनी आसानी से आकृतियां पहचान लेते हैं कि कई बार उनका स्कोर बच्चों से बेहतर भी रहा. इससे साफ है कि दिमाग की कुछ बुनियादी शक्तियां इंसानों और जानवरों में साझा हैं.