सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के सतना में अंतिम संस्कार कराने वालों को 18 पर्सेंट जीएसटी देना पड़ रहा है. कांग्रेस पार्टी ने इसको लेकर मध्य प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला भी बोला है. हालांकि, अब इस दावे की सच्चाई कुछ और ही निकलकर आ रही है. सतना नगर निगम ने खुद आधिकारिक बयान जारी करके इसकी सच्चाई बता दी है. इससे पहले, कई मीडिया संस्थानों ने खबर भी चलाई थी कि नगर निगम के शवदाह गृह में शव जलाने और अंतिम संस्कार पर आने वाले खर्च पर 18 पर्सेंट का जीएसटी भी देना पड़ रहा है.
कई खबरों में दावा किया गया था कि सतना के नगर निगम के अंतर्गत आने वाले इलेक्ट्रिक और गैस आधारित शवदाह गृह में अंतिम संस्कार पर 18 पर्सेंट जीएसटी वसूली जा रही है. कहा गया कि सतना की मेयर इन काउंसिल (MIC) ने इसकी मंजूरी भी दे दी है. हंगामा इसलिए मचा क्योंकि कानून के तहत अंतिम संस्कार पर जीएसटी नहीं वसूली जा सकता. साल 2022 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में स्पष्टीकरण दिया था कि अंतिम संस्कार जीएसटी एक्ट के तहत नहीं आता, ऐसे में शव जलाने, दफनाने या अंतिम संस्कार करने पर किसी भी तरह की जीएसटी नहीं ली जा सकती.
दावा किया गया था कि 14 मार्च को सतना नगर निगम में MIC की मीटिंग में शव जलाने का शुल्क 2100 रुपये निर्धारित किया गया और इस पर 18 प्रसेंट जीएसटी भी लगाई गई. यह भी कहा गया कि विपक्षी पार्षदों के विरोध के बाद इसे घटाकर 590 रुपये कर दिया गया. यह भी कहा गया कि 5 महीने तक यह मामला दबा रहा लेकिन जैसे ही शवदाह गृह को संचालित करने की कवायद शुरू हुई तो यह खबर सामने आ गई.
इस बारे में सतना नगर निगम के कमिश्नर शेर सिंह मीणा ने कहा है कि मीटिंग में सिर्फ इस पर चर्चा की गई थी लेकिन जीएसटी अभी तक लगाई नहीं गई है. नगर निगम के प्रेस नोट में लिखा गया है, '21 अगस्त 2024 को हुई मीटिंग में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई लेकिन किसी भी प्रकार का GST लगाया नहीं गया है.'