नई दिल्ली: अगर आप फ्लाइट से यात्रा करते हैं और आपके बोर्डिंग पास पर ‘SSSS’ लिखा दिखाई दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है. यह कोई सजा या गलती नहीं बल्कि एक अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रिया का संकेत है.
‘SSSS’ का पूरा मतलब होता है Secondary Security Screening Selection, जिसे Transportation Security Administration द्वारा लागू किया जाता है. इसका उद्देश्य यात्रियों और उड़ानों की सुरक्षा को और मजबूत करना होता है.
जब किसी यात्री के बोर्डिंग पास पर SSSS लिखा होता है, तो इसका मतलब है कि उसे सामान्य जांच के अलावा अतिरिक्त और ज्यादा गहन सुरक्षा जांच से गुजरना होगा. इसमें शरीर की पूरी जांच, बैग की विस्तृत जांच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच शामिल होती है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर उनके पास Trusted Traveller Program जैसे TSA PreCheck या Global Entry है, तो उन्हें इस तरह की जांच से छूट मिल जाएगी लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. SSSS का चयन कई बार रैंडम तरीके से किया जाता है या फिर सुरक्षा कारणों के आधार पर भी किया जा सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है और इसमें किसी विशेष व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया जाता. यह पूरी तरह से एक सुरक्षा मानक का हिस्सा है.
SSSS मिलने पर यात्रियों को अतिरिक्त समय भी लग सकता है. आमतौर पर इस प्रक्रिया में 15 से 45 मिनट तक का अतिरिक्त समय लग सकता है. कुछ मामलों में यह समय और भी ज्यादा हो सकता है.
इसलिए अगर किसी यात्री के बोर्डिंग पास पर SSSS लिखा हो, तो उसे सलाह दी जाती है कि वह एयरपोर्ट समय से पहले पहुंचे ताकि किसी तरह की परेशानी न हो. इस दौरान यात्रियों को अपने बैग खोलकर दिखाने होते हैं, लैपटॉप और मोबाइल जैसे उपकरणों की जांच करानी होती है और कभी-कभी अतिरिक्त सवालों के जवाब भी देने पड़ सकते हैं.
हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी असुविधाजनक लग सकती है, लेकिन इसका मकसद केवल सुरक्षा को मजबूत करना है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित हो.