PM Surya Ghar Yojna: गर्मी के मौसम में पंखा, कूलर और एसी चलने से बिजली का बिल बढ़ना कई परिवारों के लिए चिंता का कारण बन जाता है. ऐसे में घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली खर्च कम करने का रास्ता सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए उपलब्ध है. योजना के तहत पात्र परिवारों को सोलर सिस्टम लगाने पर केंद्र से आर्थिक सहायता मिलती है. अलग अलग राज्य सरकारें भी अपनी ओर से अतिरिक्त मदद दे रही हैं.
योजना के तहत 3 किलोवाट तक के सोलर पैनल पर केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है. इसके अलावा कई राज्यों ने अपनी अलग सहायता राशि तय की है. उत्तर प्रदेश और दिल्ली में अतिरिक्त ₹30 हजार तक की मदद बताई गई है, जबकि झारखंड में 3 किलोवाट सिस्टम पर ₹45 हजार तक अतिरिक्त सहायता का प्रावधान है. राजस्थान और बिहार में भी केंद्रीय मदद के ऊपर राज्य स्तर से आर्थिक सहायता मिलती है.
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत 2024 में हुई थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 50 लाख से अधिक घर इस योजना से जुड़े हैं और करीब 19 लाख घरों में बिजली बिल शून्य होने की रिपोर्ट दी गई है. सरकार का लक्ष्य 2027 तक एक करोड़ घरों में सोलर पैनल लगाने का है. योजना में 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ भी बताया गया है.
उत्तर प्रदेश में 3 किलोवाट सोलर पैनल पर केंद्र की ₹78 हजार सब्सिडी के साथ ₹30 हजार अतिरिक्त सहायता दी जा रही है. दिल्ली में भी इतनी ही अतिरिक्त मदद बताई गई है. झारखंड में निम्न आय वर्ग के परिवारों को ₹15 हजार प्रति किलोवाट की अतिरिक्त सहायता मिलती है. राजस्थान में ₹17 हजार और बिहार में ₹10 हजार प्रति किलोवाट, अधिकतम ₹20 हजार तक की राज्य सहायता का प्रावधान बताया गया है.
योजना के लिए pmsuryaghar.gov.in पर जाकर 'Apply for Rooftop Solar' विकल्प चुनना होगा. इसके बाद राज्य और बिजली वितरण कंपनी की जानकारी देकर उपभोक्ता नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल दर्ज करना होगा. लॉगिन के बाद RTS पैनल के लिए आवेदन किया जा सकता है. फीजिबिलिटी अप्रूवल मिलने पर DISCOM से पंजीकृत वेंडर के जरिए सोलर सिस्टम लगवाया जा सकता है.
योजना का लाभ लेने के लिए घर के नाम पर ग्रिड कनेक्टेड बिजली कनेक्शन होना चाहिए और छत पर सोलर सिस्टम लगाने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए. सिस्टम लगने के बाद DISCOM द्वारा सत्यापन किया जाता है. इसके बाद सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी होती है. यानी आवेदन से लेकर इंस्टॉलेशन और सत्यापन तक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है.