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बंद पड़ा बैंक खाता कैसे चालू करें? जानें री एक्टिवेशन की पूरी प्रक्रिया

यदि आपके बैंक खाते में दो साल से कोई लेनदेन नहीं हुआ है, तो वह निष्क्रिय हो सकता है. इसे बैंक में केवाईसी और आवश्यक दस्तावेज जमा कर दोबारा सक्रिय कराया जा सकता है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
बंद पड़ा बैंक खाता कैसे चालू करें? जानें री एक्टिवेशन की पूरी प्रक्रिया
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: अगर किसी बैंक खाते में लगातार 2 वर्षों तक कोई ग्राहक-आरंभित लेनदेन नहीं होता है, तो भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के नियमों के अनुसार उसे इनऑपरेटिव या डोरमेंट खाता घोषित किया जा सकता है. 

यदि ऐसा खाता 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक निष्क्रिय रहता है, तो उसमें जमा राशि बैंक द्वारा आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड यानी DEAF में स्थानांतरित कर दी जाती है. हालांकि, खाते में जमा राशि पर आपका अधिकार बना रहता है और निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर उसे वापस प्राप्त किया जा सकता है.

निष्क्रिय खाते को दोबारा कैसे चालू करें?

बंद पड़े खाते को सक्रिय कराने के लिए सबसे पहले अपनी संबंधित बैंक शाखा में जाएं और खाता री एक्टिवेशन का फॉर्म भरें. इसके साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पहचान और पते के प्रमाण की स्वसत्यापित प्रतियां जमा करें. 

कई बैंक अब वीडियो केवाईसी की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कुछ मामलों में घर बैठे भी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. केवाईसी पूरा होने और बैंक की मंजूरी मिलने के बाद खाते में एक छोटा जमा या निकासी लेनदेन करना बेहतर माना जाता है, ताकि खाता सक्रिय बना रहे.

क्या बैंक री एक्टिवेशन के लिए शुल्क ले सकता है?

आरबीआई के नियमों के अनुसार बैंक निष्क्रिय खाते को दोबारा सक्रिय करने के लिए ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं ले सकते. यदि आपका खाता केवल निष्क्रिय होने के कारण बंद पड़ा है, तो उसे चालू कराने के लिए अलग से कोई री एक्टिवेशन फीस नहीं देनी होती.

पुराने अनक्लेम्ड पैसे का पता कैसे लगाएं?

अगर आपको याद नहीं है कि आपका पुराना पैसा किस बैंक में जमा है, तो आरबीआई का UDGAM पोर्टल आपकी मदद कर सकता है. इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण करने के बाद नाम, मोबाइल नंबर और पैन कार्ड या वोटर आईडी जैसी जानकारी दर्ज करके विभिन्न बैंकों में मौजूद अपने अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी एक ही स्थान पर देख सकते हैं. यदि आपके नाम से कोई राशि दिखाई देती है, तो संबंधित बैंक शाखा में आवश्यक दस्तावेज जमा कर राशि का दावा किया जा सकता है.

बैंक खाता लंबे समय तक निष्क्रिय रहने पर भी उसमें जमा राशि खत्म नहीं होती. पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बाद ग्राहक अपनी मूल राशि तथा लागू नियमों के अनुसार देय ब्याज प्राप्त कर सकता है. इसलिए यदि आपका कोई पुराना बैंक खाता है, तो उसकी स्थिति की समय पर जांच करना लाभदायक हो सकता है.