नई दिल्ली: त्योहार आते ही घर में खरीदारी की रौनक बढ़ जाती है. कपड़ों से लेकर घर की सजावट, पूजा का सामान, गिफ्ट और इलेक्ट्रॉनिक्स तक कई चीजें खरीदने की तैयारी शुरू हो जाती है. ऐसे में उत्साह के बीच बजट का हिसाब पीछे छूट सकता है. खासकर घर की खरीदारी संभालने वाली महिलाओं के लिए जरूरी है कि हर खर्च सोच-समझकर किया जाए. छोटी-सी लापरवाही त्योहार खत्म होने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है.
फेस्टिव शॉपिंग के दौरान ऑफर और छूट लोगों को आकर्षित करते हैं. कई बार ऐसा सामान भी खरीद लिया जाता है जिसकी तत्काल जरूरत नहीं होती. वहीं क्रेडिट कार्ड से भुगतान की सुविधा खर्च को और आसान बना देती है. इसलिए खरीदारी शुरू करने से पहले कुल बजट तय करना और जरूरी चीजों की सूची बनाना फायदेमंद हो सकता है. साथ ही कीमत, ऑफर, वारंटी और रिटर्न जैसी शर्तों को भी ध्यान से देखना चाहिए.
बिना बजट के त्योहार की खरीदारी शुरू करना जेब पर भारी पड़ सकता है. पहले यह तय करें कि कुल कितना पैसा खर्च किया जा सकता है. इसके बाद कपड़े, गिफ्ट, घर की सजावट और अन्य जरूरतों के लिए अलग-अलग रकम तय करें. खरीदारी की सूची भी पहले तैयार करें, ताकि उत्साह में गैरजरूरी सामान लेने से बचा जा सके. तय सीमा से बाहर जाने से पहले यह जरूर सोचें कि वह खर्च वास्तव में जरूरी है या नहीं.
बड़ी छूट देखकर खरीदारी करना आकर्षक लग सकता है, लेकिन हर ऑफर फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं. 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट देखकर सामान लेने से पहले उसकी वास्तविक कीमत और उपयोगिता जांचें. अगर किसी वस्तु की जरूरत ही नहीं है तो कम कीमत पर खरीदना भी अतिरिक्त खर्च है. इसलिए केवल ऑफर देखकर फैसला लेने के बजाय यह देखें कि सामान आपके काम का है या नहीं और उसकी कीमत दूसरी जगह कितनी है.
क्रेडिट कार्ड त्योहारों की खरीदारी को आसान बनाता है, लेकिन बजट से अधिक खर्च करना बाद में परेशानी पैदा कर सकता है. उतना ही भुगतान कार्ड से करें, जितना तय समय पर चुकाना संभव हो. पूरा बिल समय पर नहीं चुकाने पर ब्याज और दूसरे शुल्क लग सकते हैं. इसलिए खरीदारी से पहले यह देखना जरूरी है कि मौजूदा बजट और आने वाले भुगतान को ध्यान में रखते हुए कार्ड से कितना खर्च किया जा सकता है.
त्योहार का बजट बनाते समय सिर्फ सामान खरीदने की रकम को ध्यान में रखना पर्याप्त नहीं है. यात्रा, मेहमानों की मेजबानी, बाहर खाना, पूजा और दूसरे छोटे-बड़े खर्च भी सामने आ सकते हैं. इसलिए पूरी रकम खरीदारी में खर्च करने के बजाय कुछ पैसा इन जरूरी खर्चों के लिए अलग रखें. किसी वस्तु को खरीदने से पहले अलग-अलग दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उसकी कीमत, ऑफर, वारंटी और रिटर्न पॉलिसी की तुलना करना भी समझदारी भरा कदम हो सकता है.