नई दिल्ली: क्रेडिट कार्ड लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर खराब हो सकता है. कभी कार्ड टूट जाता है तो कभी उसका चिप ठीक से काम नहीं करता. ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपने कार्ड जारी करने वाले बैंक से संपर्क करें. इसके लिए बैंक का आधिकारिक मोबाइल ऐप, वेबसाइट, कस्टमर केयर या शाखा इस्तेमाल की जा सकती है.
रिप्लेसमेंट के नाम पर किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें. SMS, ईमेल या WhatsApp पर आए संदिग्ध लिंक के जरिए कार्ड बदलने की प्रक्रिया शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है.
बैंक से संपर्क करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिप्लेसमेंट कार्ड के लिए अनुरोध किया जा सकता है. ध्यान रखें कि रिप्लेसमेंट कार्ड का मतलब मौजूदा कार्ड को बदलना है. यह पूरी तरह नया क्रेडिट कार्ड अकाउंट खोलने जैसा नहीं होता. अनुरोध करने से पहले बैंक से यह भी पूछ लें कि नया कार्ड कब तक मिलेगा. साथ ही यह जानकारी लें कि रिप्लेसमेंट के बाद मौजूदा क्रेडिट लिमिट और अकाउंट जारी रहेगा या नहीं.
रिप्लेसमेंट कार्ड मिलने के बाद उसकी कुछ जानकारियां बदल सकती हैं. कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट या CVV अलग हो सकता है. इसलिए पुराने कार्ड से जुड़े सभी ऑटोमैटिक पेमेंट और सब्सक्रिप्शन की सूची बना लेना बेहतर है. OTT सब्सक्रिप्शन, इंश्योरेंस प्रीमियम, ऑनलाइन शॉपिंग और दूसरे नियमित भुगतानों में नए कार्ड की जानकारी अपडेट करनी पड़ सकती है. यह भी याद रखें कि कार्ड बदलने से पुराने कार्ड का बकाया खत्म नहीं होता.
नया कार्ड मिलने के बाद उसे केवल बैंक के आधिकारिक माध्यम से ही एक्टिवेट करें. बैंक के निर्देशों के अनुसार PIN सेट या वेरिफाई करें. सबसे जरूरी बात, कार्ड रिप्लेसमेंट के नाम पर किसी व्यक्ति के साथ OTP, PIN या CVV साझा न करें. बैंक का कोई अधिकारी या कर्मचारी इन संवेदनशील जानकारियों की मांग करके कार्ड एक्टिवेट नहीं करता. कार्ड एक्टिवेट होने के बाद हाल के लेनदेन भी जांच लें और सुनिश्चित करें कि पुराना कार्ड ब्लॉक या रिप्लेस हो चुका है. अगर कार्ड लगातार परेशानी दे रहा है, तो रिप्लेसमेंट में देरी न करना बेहतर है.