बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है, जिससे हर महीने आने वाला बिजली बिल लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग अब अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगाने की योजना बना रहे हैं. हालांकि, सोलर पैनल खरीदने से पहले सही तकनीक का चुनाव करना सबसे जरूरी है. अगर बिना जानकारी के पैनल खरीद लिया जाए तो उम्मीद के मुताबिक बिजली उत्पादन नहीं मिल पाता. ऐसे में जानिए किस तरह का सोलर पैनल आपके घर और जरूरत के हिसाब से सबसे बेहतर रहेगा.
अगर आपका लक्ष्य कम जगह में ज्यादा बिजली बनाना है, तो N type TOPCon और मोनोक्रिस्टलाइन बाईफेशियल सोलर पैनल बेहतर विकल्प माने जाते हैं. इनकी कार्यक्षमता लगभग 22 से 25 प्रतिशत तक होती है. खास बात यह है कि धूप कम होने पर भी ये पैनल बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम होते हैं और लगातार बिजली उत्पादन बनाए रखते हैं.
N type TOPCon नई तकनीक पर आधारित सोलर पैनल है, जिसकी कार्यक्षमता 22 से 25 प्रतिशत तक बताई जाती है. वहीं मोनोक्रिस्टलाइन पैनल 20 से 23 प्रतिशत तक दक्षता के साथ कम जगह में अच्छा बिजली उत्पादन देता है और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन बनाए रखता है. दूसरी ओर पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल की कार्यक्षमता 15 से 17 प्रतिशत तक होती है और इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है.
अगर आपके घर में बिजली की खपत सीमित है और बजट भी कम है, तो पॉलीक्रिस्टलाइन सोलर पैनल एक उपयुक्त विकल्प हो सकता है. इसकी शुरुआती लागत कम होती है, हालांकि बिजली उत्पादन अन्य आधुनिक तकनीकों की तुलना में कम रहता है. इसलिए खरीदने से पहले अपनी जरूरत और बजट का आकलन जरूर करें.
यदि आप PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर पैनल लगवाते हैं, तो सरकार की ओर से सब्सिडी का लाभ भी मिल सकता है. इससे सोलर सिस्टम लगाने की शुरुआती लागत कम हो सकती है और लंबे समय में बिजली बिल पर भी राहत मिलती है.
अगर आपके घर का मासिक बिजली बिल करीब 3,000 से 4,000 रुपये तक आता है, तो 3KW या 5KW क्षमता वाला सोलर सिस्टम बेहतर विकल्प माना जा सकता है. हालांकि, पैनल लगाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि छत पर पर्याप्त जगह हो और वहां पूरे दिन अच्छी धूप आती हो. सही स्थान पर लगाया गया सोलर पैनल अधिक बिजली उत्पादन कर सकता है और बिजली बिल कम करने में मददगार साबित हो सकता है.