नई दिल्ली: बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है तो सितंबर में तारीख देखकर ही योजना बनाना बेहतर होगा. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU ने 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों और अधिकारियों की कई मांगों पर सरकार तथा बैंक प्रबंधन की ओर से फैसला नहीं लिया गया है. हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है, इसलिए ग्राहकों के लिए पहले से जानकारी रखना जरूरी हो गया है.
11 सितंबर शुक्रवार बैंक हड़ताल प्रस्तावित है. इसके तुरंत बाद 12 और 13 सितंबर को शनिवार और रविवार का अवकाश रहेगा. कुछ जगह 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी की छुट्टी भी पड़ रही है. इस वजह से इन राज्यों में बैंक लगातार चार दिन तक बंद रह सकते हैं. इसके अलावा सितंबर के अंत में तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है, जबकि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की बात कही गई है.
11 सितंबर को इस हड़ताल के बाद 12 और 13 सितंबर को शनिवार रविवार होने बैंक बंद रहेंगे. कुछ राज्यों में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का अवकाश भी है. ऐसे में वहां बैंकिंग सेवाएं चार दिन प्रभावित हो सकती हैं. हालांकि यह स्थिति राज्यों में छुट्टी के अनुसार अलग हो सकती है.
UFBU ने सितंबर में हड़ताल की चेतावनी दी है. संगठन के मुताबिक 28 सितंबर से तीन दिन की हड़ताल हो सकती है. यानी महीने आखिरी हिस्से में बैंकिंग कामकाज पर असर पड़ने की संभावना बनी रहेगी. यूनियनों की मांगों पर सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से समाधान नहीं होने पर यह कदम उठाया जा सकता है.
बैंक यूनियनों की प्रमुख मांग है कि सप्ताह में केवल पांच दिन बैंक खोले जाएं. इसके साथ ही कर्मचारियों ने PLI योजना में बदलाव की मांग उठाई है. यूनियनों का कहना है कि इन मांगों पर फैसला जरूरी है. फिलहाल इन्हीं मांगों को लेकर 11 सितंबर की देशव्यापी हड़ताल का फैसला सामने आया है.
कर्मचारियों और अधिकारियों की मांगों में पेंशन से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं. यूनियनों ने पेंशन को अपडेट करने और उसमें सुधार की मांग की है. इसके अलावा सभी पेंशनधारकों के लिए महंगाई भत्ते का एक समान नियम लागू करने की बात कही गई है.
बैंक यूनियनों ने NPS में शामिल कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना यानी OPS में जाने का विकल्प देने की मांग भी रखी है. यह मांग भी उन मुद्दों में शामिल है, जिन पर संगठन सरकार और बैंक प्रबंधन का ध्यान चाहते हैं. यूनियनों के मुताबिक कई मांगों पर अभी समाधान नहीं निकला है.