नई दिल्ली: आज के समय में जरूरत पड़ने पर कर्ज मिलना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है. मोबाइल पर मौजूद कई लोन ऐप कुछ ही समय में पैसे उपलब्ध कराने का दावा करते हैं. लेकिन आसान तरीके से मिला पैसा कब भारी देनदारी में बदल जाता है, इसका पता कई बार देर से चलता है. ब्याज, ईएमआई और क्रेडिट कार्ड के भुगतान के बीच मासिक बजट लगातार दबाव में आने लगता है.
कर्ज खत्म करने की दिशा में पहला कदम सभी देनदारियों की पूरी लिस्ट तैयार करना है. कागज या डिजिटल नोट में हर कर्ज की रकम, ब्याज और भुगतान की जानकारी लिखें. छोटे बड़े सभी कर्ज एक जगह दिखाई देने लगेंगे तो वास्तविक स्थिति समझना आसान होगा. यही जानकारी आगे भुगतान की प्राथमिकता तय करने में मदद करेगी. बिना हिसाब जाने अलग अलग जगह पैसे लगाना अक्सर योजना को उलझा सकता है.
सभी देनदारियों की जानकारी मिलने के बाद उस कर्ज पर ध्यान देना चाहिए जिस पर सबसे ज्यादा ब्याज जा रहा है. ऐसे कर्ज को प्राथमिकता देने से ब्याज के रूप में निकलने वाली अतिरिक्त रकम को कम करने में मदद मिल सकती है. बाकी देनदारियों के जरूरी भुगतान जारी रखते हुए अधिक ब्याज वाले कर्ज को तेजी से कम करने की योजना बनाई जा सकती है. इससे कुल भुगतान का बोझ नियंत्रित करने में मदद मिलती है.
जब पहले से भारी कर्ज मौजूद हो, तब नए निवेश में पैसा लगाने से पहले अपनी देनदारी की लागत समझना जरूरी है. शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या दूसरी जगह निवेश करने के बजाय पहले मौजूदा कर्ज की स्थिति सुधारने पर ध्यान दिया जा सकता है. खासकर महंगे कर्ज के मामले में ब्याज का बोझ महत्वपूर्ण होता है. इसलिए निवेश का निर्णय लेने से पहले कर्ज की ब्याज दर और अपनी वित्तीय क्षमता को जरूर देखें.
क्रेडिट कार्ड की सुविधा जरूरत के समय उपयोगी हो सकती है, लेकिन लगातार उधार पर खरीदारी करने से देनदारी बढ़ सकती है. कर्ज चुकाने की कोशिश के दौरान गैरजरूरी क्रेडिट कार्ड खर्च रोकना मददगार हो सकता है. नए खर्च करने के बजाय उपलब्ध रकम को मौजूदा भुगतान की ओर लगाना बेहतर रणनीति हो सकती है. हालांकि, कार्ड बंद करने या भुगतान रोकने से पहले उसके नियम, बकाया और संभावित शुल्क की जानकारी जरूर लें.
कर्ज चुकाने की प्रक्रिया में महंगे मोबाइल, गाड़ी या दूसरी गैरजरूरी चीजों की खरीदारी टालना समझदारी हो सकती है. जब तक पुरानी देनदारी कम नहीं होती, तब तक अपनी प्राथमिक जरूरतों पर ही खर्च रखने से पैसा बचाया जा सकता है. बची हुई रकम को कर्ज भुगतान में लगाने से देनदारी घटाने की रफ्तार बढ़ सकती है. कुछ समय का संयम आगे आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद कर सकता है.