सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए बेसिक-पे बहुत अहम होती है. इसकी रकम ज्यादा होने पर सिर्फ हर महीने मिलने वाली सैलरी ही नहीं, बल्कि सालाना इंक्रीमेंट और कुछ भत्तों पर भी असर पड़ सकता है. इसी वजह से कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक-पे बढ़ाई जाए. उन्होंने इसे 69,000 रुपये से 72,000 रुपये तक करने का प्रस्ताव रखा है.
हर साल मिलने वाली वेतन वृद्धि की दर भी बढ़ाने की भी मांग की है. आयोग ने 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कर्मचारी संगठनों और दूसरे संबंधित पक्षों से चर्चा की. इससे पहले 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बैठक हुई थी.
कर्मचारी संगठनों ने बेसिक-पे बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रस्ताव दिए हैं. NC-JCM के स्टाफ साइड ने न्यूनतम बेसिक-पे 69,000 रुपये और 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. वहीं, BPMS ने 72,000 रुपये बेसिक-पे और 4 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है. संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों की सैलरी में बेहतर बढ़ोतरी होनी चाहिए. लेकिन ये रकम अभी तय नहीं हुई हैं.
बेसिक-पे आपकी सैलरी का मूल हिस्सा होती है. इसमें DA और HRA जैसे भत्ते शामिल नहीं होते. इन भत्तों की गणना में बेसिक-पे की अहम भूमिका हो सकती है. आसान शब्दों में समझें तो बेसिक-पे बढ़ने पर कर्मचारी की कुल कमाई भी बढ़ सकती है. हालांकि, वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि नए वेतन आयोग में कौन-से नियम लागू किए जाते हैं.
फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत सालाना इंक्रीमेंट की दर 3% है. उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक-पे 50,000 रुपये है, तो 3% के हिसाब से उसकी वेतन वृद्धि 1,500 रुपये होगी. वहीं, 70,000 रुपये बेसिक-पे पर 3% इंक्रीमेंट 2,100 रुपये बनेगा. यानी बेसिक-पे ज्यादा होने पर समान दर से भी रुपये में अधिक बढ़ोतरी होती है. कर्मचारी संगठन इंक्रीमेंट की दर 6% करने की मांग कर रहे हैं.
DA यानी महंगाई भत्ता बढ़ती महंगाई के असर को कम करने के लिए दिया जाता है. HRA यानी मकान किराया भत्ता घर के किराये के खर्च में मदद करता है. इनकी गणना में बेसिक-पे की भूमिका होती है, इसलिए बेसिक-पे बढ़ने पर इनकी रकम भी बढ़ सकती है. पेंशन, ग्रेच्युटी और छुट्टियों के बदले मिलने वाली रकम पर भी असर संभव है. हालांकि, हर लाभ संबंधित नियमों के अनुसार तय होता है.