आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT ने उन करदाताओं के लिए ITR दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ा दी है, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट कराना जरूरी है. ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख अब 31 अक्टूबर 2026 के बजाय 21 नवंबर 2026 कर दी गई है.
CBDT ने यह फैसला त्योहारों के सीजन और टैक्स ऑडिट से जुड़े काम के दबाव को देखते हुए लिया है. हालांकि, जिन लोगों के लिए ऑडिट जरूरी नहीं है, उनकी ITR फाइलिंग की डेडलाइन पहले ही खत्म हो चुकी है.
21 नवंबर 2026 की डेडलाइन उन करदाताओं पर लागू होगी, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट कराना अनिवार्य है. इसमें व्यापार और पेशे से कमाई करने वाले कई टैक्सपेयर्स शामिल हैं. ऐसे बड़े कारोबारी जिनका सालाना टर्नओवर निर्धारित सीमा से अधिक है और जिनके लिए ऑडिट जरूरी है, उन्हें इस तारीख तक रिटर्न दाखिल करना होगा.
इसके अलावा डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील, आर्किटेक्ट और इंजीनियर जैसे पेशेवर भी इसमें शामिल हो सकते हैं, अगर उनकी आय और लागू नियमों के मुताबिक ऑडिट की जरूरत बनती है. घरेलू और विदेशी कंपनियों समेत अन्य ऑडिट वाले करदाताओं के लिए भी यह संशोधित समय-सीमा महत्वपूर्ण है.
नौकरीपेशा लोगों और उन आम व्यक्तिगत करदाताओं के लिए यह 21 नवंबर वाली डेडलाइन नहीं है, जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है. उनके लिए ITR दाखिल करने की सामान्य अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 थी. इसी तरह छोटे कारोबारी या पेशेवर, जो लागू शर्तों के तहत अनुमानित कर यानी Presumptive Tax योजना का इस्तेमाल करते हैं और जिनके लिए टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है, वे भी इस विशेष डेडलाइन के दायरे में नहीं आते.
अगर ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स 21 नवंबर 2026 तक ITR दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो वे बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं. असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा 31 दिसंबर 2026 या असेसमेंट पूरा होने से पहले तक बताई गई है, इनमें जो पहले हो, वह लागू होगा. हालांकि, देर से ITR दाखिल करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है.
अगर करदाता की कुल आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो देरी से ITR दाखिल करने पर 5,000 रुपये की लेट फीस लग सकती है. वहीं, कुल आय 5 लाख रुपये या उससे कम होने पर लेट फीस 1,000 रुपये तक हो सकती है.
इसलिए जिन टैक्सपेयर्स के लिए 21 नवंबर 2026 की डेडलाइन लागू होती है, उन्हें समय रहते अपना रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए. समय-सीमा चूकने पर न सिर्फ लेट फीस का भुगतान करना पड़ सकता है, बल्कि टैक्स से जुड़े अन्य अनुपालनों में भी परेशानी हो सकती है.