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कैसे होता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम और कैसे करें बचाव? यहां मिलेगी सारी जानकारी

डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर जागरुकता फैलाना बेहद ही जरूरी हो गया है. अगर आपको अभी तक इसके बारे में नहीं पता है, तो यहां हमको इसके बारे में सभी डिटेल्स दे रहे हैं.

Shilpa Shrivastava
कैसे होता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम और कैसे करें बचाव? यहां मिलेगी सारी जानकारी
Courtesy: Grok AI

नई दिल्ली: आजकल डिजिटल अरेस्ट के मामले फिर से बहुत ज्यादा आने लगे हैं. ऐसे में लोगों को फिर से जागरुक होने की बहुत ज्यादा जरूरत है. साथ ही यह भी समझना होगा कि इससे कैसे बचा जा सकता है. डिजिटल अरेस्ट एक तरह का साइबर स्कैम है, जहां स्कैमर्स पुलिस अधिकारी, CBI, ED या साइबरक्राइम इन्वेस्टिगेटर होने का नाटक करते हैं. ये लोग पीड़ितों को कॉल कर उन पर मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग ट्रैफिकिंग, पहचान की चोरी या कस्टम फ्रॉड जैसे आरोप लगाते हैं. 

सबसे पहले तो आपको यह समझना होगा कि डिजिटल अरेस्ट शब्द कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है. यह स्कैमर्स का बनाया हुआ एक डर है, जिससे लोग पैसे देने पर मजबूर हो जाते हैं. इस स्कैम के तहत फोन करके लोगों को उन पर किसी केस के होने का डर बनाया जाता है और फिर इससे बचाने के लिए पैसे की मांग की जाती है. जब तक पीड़ित उनकी मांगें पूरी नहीं करते, तब तक उनकी एक्टिविटीज को डिजिटल रूप से प्रतिबंधित करा दिया जाता है. 

कैसे किया जाता है डिजिटल अरेस्ट?

पीड़ितों को फंसाने का यह नया तरीका है. इसमें सोशल इंजीनियरिंग, फेक आईडेंटिटी और साइकोलॉजिकल प्रेशर का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक प्रोसेस होता है, जो अनचाहे फोन कॉल, वीडियो कॉल (जैसे WhatsApp या Skype के जरिए), ईमेल, या मैसेज से शुरू होता है. फिर स्कैमर्स खुद को किसी सरकारी एजेंसी, कानून लागू करने वाली संस्था या कूरियर सर्विस की तरफ से बताता है. इस पर यकीन दिलाने के लिए पीड़ित को उसका आधार, पैन, बैंक अकाउंट या फोन नंबर जैसी जानकारी का भी हवाला देता है. 

  • आरोप और नकली सबूत: स्कैमर पीड़ित पर किसी अपराध का आरोप लगाता है, जैसे कि उनसे जुड़े किसी पार्सल में अवैध सामान (जैसे ड्रग्स) होना या मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होना. वो जाली डॉक्यूमेंट, फेक गिरफ्तारी वारंट, मनगढ़ंत वीडियो या डीपफेक सबूत पेश करते हैं ताकि दावा असली लगे.

  • डिजिटल अरेस्ट थोपना: पीड़ितों को बताया जाता है कि वो डिजिटल अरेस्ट या वर्चुअल हिरासत में हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें लगातार कॉल पर रहना होगा. यह कई बार कई घंटों और कई दिनों तक भी चलता है. इस दौरान कॉल को डिस्कनेक्ट करने या फिर किसी से कॉन्टैक्ट करने के लिए भी मना किया जाता है. इसके साथ ही अगर पीड़ित बात नहीं मानते हैं तो गिरफ्तारी, अकाउंट फ्रीज या परिवार को शामिल करने की धमकी दे सकते हैं. 

  • फिरौती की मांग: पीड़ित इस पूरे माहौल से दबाव में आ जाता है और मामले को सुलझाने के लिए जुर्माना या फिरौती देने को तैयार हो जाता है. यह पेमेंट UPI, बैंक ट्रांसफर, गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी या स्कैमर्स द्वारा कंट्रोल किए जाने वाले अकाउंट में वायर ट्रांसफर जैसे तेज तरीकों लिया जाता है. 

डिजिटल अरेस्ट स्कैम से सुरक्षित कैसे रहें? 

  • रेड फ्लैग्स को पहचानें: अगर किसी कॉल पर आप पर अपराधों का आरोप लगाया जाता है, तुरंत पेमेंट की मांग की जाती है या डिजिटल अरेस्ट का दावा किया जाता है, तो वो स्कैम होता है. इस तरह के कॉल को तुरंत काट दें.

  • खुद से वेरिफाई करें: कॉलर जो कॉन्टैक्ट डिटेल्स दे रहा है उसे खुद से वेरिफाई करें. पुलिस या एजेंसियों के आधिकारिक नंबर (जैसे, सरकारी वेबसाइटों के जरिए) ढूंढें और पुष्टि करने के लिए सीधे उन्हें कॉल करें.

  • निजी जानकारी सुरक्षित रखें: ऐसे कॉल के आधार पर कभी भी OTP, बैंक डिटेल्स, आधार/पैन नंबर शेयर न करें, या पैसे ट्रांसफर न करें. कोई भी अधिकारी इस तरह की डिटेल्स नहीं मांगता है. 

  • तुरंत रिपोर्ट करें: अगर आप इसका शिकार होते हैं, तो स्थानीय पुलिस, साइबरक्राइम पोर्टल (जैसे, भारत में cybercrime.gov.in) या 1930 जैसी राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें. रिपोर्ट करने से स्कैमर्स को ट्रैक करने और रोकने में मदद मिलती है.

  • जागरुक रहें: इस तरह के स्कैम के बारे में जागरुक रहें. साथ ही दूसरों को शिक्षित करें: स्कैम के बारे में जानने के लिए भरोसेमंद स्रोतों का इस्तेमाल करें, अकाउंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें.