नई दिल्लीः स्मार्टफोन और लैपटॉप खरीदने का सपना देखने वालों के लिए 2026 की शुरुआत एक बड़ी चुनौती लेकर आई है. डिजिटल बाजार के जानकारों और टेक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले हफ्तों में गैजेट्स की कीमतों में भारी उछाल आने वाला है. मुख्य रूप से रैम (RAM) और मेमोरी चिप्स की वैश्विक किल्लत के कारण स्मार्टफोन और लैपटॉप की लागत में 20% से 30% तक की वृद्धि होने की संभावना है.
इस अचानक आई तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का वैश्विक विस्तार है. वर्तमान में दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियां अपने एआई डेटा सेंटर्स को मजबूत करने में लगी हैं, जिनमें सामान्य गैजेट्स के मुकाबले कहीं अधिक शक्तिशाली मेमोरी चिप्स की जरूरत होती है.
डॉलर के मुकाबले रुपए की अस्थिरता
भारतीय बाजार के लिए स्थिति और भी पेचीदा हो गई है क्योंकि यहां की कंपनियां पुर्जों के लिए आयात पर निर्भर हैं. डॉलर के मुकाबले रुपए की अस्थिरता और बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च ने आग में घी डालने का काम किया है. सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों ने अपना ध्यान कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से हटाकर एआई सर्वर की ओर शिफ्ट कर दिया है. सप्लाई और डिमांड के इस असंतुलन ने रैम की थोक कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है, जिसका बोझ अब सीधे ग्राहकों पर डाला जा रहा है.
टेक ब्रांड्स अब अपनी लागत कम करने के लिए फोन्स के फीचर्स के साथ समझौता कर सकते हैं. मुमकिन है कि कंपनियां अब अधिक रैम वाले फोन्स की जगह कम रैम वाले मॉडल्स बाजार में उतारें या फिर मौजूदा मॉडल्स की कीमतें रातों-रात बढ़ा दें. लैपटॉप बाजार में भी डेल और लेनोवो जैसे ब्रांड्स कीमतों में संशोधन की तैयारी कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग इस साल नया डिवाइस खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए अगले कुछ दिन ही सही मौका हो सकते हैं. जैसे ही रिटेल स्टोर्स का पुराना स्टॉक खत्म होगा, नई और महंगी एमआरपी (MRP) वाले प्रोडक्ट्स बाजार में अपनी जगह बना लेंगे.
ऐसे में समझदारी इसी में है कि अगर आपको वाकई किसी गैजेट की जरूरत है, तो कीमतों के बेकाबू होने से पहले ही अपनी खरीदारी पूरी कर लें. 2026 का यह साल टेक जगत के लिए महंगाई का साल साबित होने जा रहा है.