नई दिल्ली: भारत में तेज इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने की दिशा में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड को लेकर बड़ा कदम सामने आया है. सचिवों के समूह ने कंपनियों को सैटेलाइट स्पेक्ट्रम देने से जुड़ी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद Starlink, OneWeb और Reliance Jio जैसी कंपनियों के लिए भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. हालांकि, अभी अंतिम फैसला बाकी है.
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को लेकर पिछले सप्ताह डिजिटल कम्युनिकेशन कमीशन की बैठक भी हुई थी. सचिवों के समूह की मंजूरी मिलने के बाद अब प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाएगा. लेकिन इसे लागू करने से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम मंजूरी लेनी होगी. यानी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत की दिशा में अहम पड़ाव जरूर पार हुआ है, लेकिन प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.
पिछले साल ट्राई ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटन को लेकर अपनी सिफारिशें सरकार को दी थीं. अब सचिवों के समूह ने इन सिफारिशों को मंजूरी दे दी है. प्रस्ताव के अनुसार, कंपनियों को पांच साल की अवधि के लिए सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा. इसके बदले उन्हें अपने समायोजित सकल राजस्व यानी एजीआर का 5 प्रतिशत स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज देना होगा. यह शुल्क व्यवस्था सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए अहम होगी.
सैटेलाइट ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल खासतौर पर उन इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में उपयोगी हो सकता है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है. इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने वाली कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज कम रखने का प्रस्ताव है. इससे ऐसे क्षेत्रों में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी. हालांकि, शुल्क में कमी से जुड़ी पूरी व्यवस्था भी सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही लागू होगी.
स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर मिली मंजूरी से Starlink, OneWeb और Reliance Jio जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है. ये कंपनियां सैटेलाइट के जरिए ब्रॉडबैंड सेवाएं देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. सचिवों के समूह की मंजूरी के बाद अब उनके लिए सरकारी व्यवस्था के तहत स्पेक्ट्रम हासिल करने का रास्ता आगे बढ़ सकता है. हालांकि, सेवाओं की शुरुआत और पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए कैबिनेट की मंजूरी अभी जरूरी है.
फिलहाल सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर सबसे अहम अगला कदम केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी है. कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा. प्रस्ताव के तहत पांच साल के लिए स्पेक्ट्रम और एजीआर का 5 प्रतिशत एसयूसी तय किया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए शुल्क कम रखा जाएगा. ऐसे में आने वाला फैसला भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा.