नई दिल्ली: दुनिया भर में मशहूर AI कंपनी OpenAI एक नए कानूनी विवाद में फंस गई है. अमेरिका में कंपनी के खिलाफ एक क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ChatGPT इस्तेमाल करने वाले लोगों का निजी डेटा उनकी साफ सहमति के बिना Google और Meta के साथ शेयर किया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक मुकदमे में दावा किया गया है कि ChatGPT पर पूछे गए सवाल, ईमेल पते और दूसरी निजी जानकारी ट्रैकिंग टूल्स के जरिए इन कंपनियों तक पहुंचाई गई. यह मामला कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत में दायर किया गया है.
शिकायत के अनुसार ChatGPT वेबसाइट पर यूजर्स की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए ट्रैकिंग टूल्स लगाए गए थे. बताया जा रहा है कि इन टूल्स में Meta Pixel और Google Analytics जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. आरोप है कि इन टूल्स के जरिए यूजर की जानकारी अपने आप Google और Meta तक पहुंच जाती थी. हालांकि यह खबर लिखे जाने तक OpenAI ने इस मामले पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया था.
मुकदमे में यह भी कहा गया है कि आज कई लोग AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल निजी सलाहकारों के तौर पर करते हैं. यूजर्स उनके साथ कई तरह की जानकारी शेयर करते हैं. जिसमें सेहत से जुड़े सवाल, कानूनी मामले, वित्तीय जानकारी और यहां तक कि निजी समस्याएं भी शामिल हैं.
जिसके वजह से यूजर्स उम्मीद करते हैं कि उनकी बातचीत पूरी तरह से निजी रहेगी. शिकायत में जोर देकर कहा गया है कि ChatGPT से जुड़ा निजता का मुद्दा सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह लाखों लोगों की निजी जानकारी और उन पर उनके निजी नियंत्रण से जुड़ा मामला है.
असल में Meta Pixel और Google Analytics जैसे टूल्स का इस्तेमाल वेबसाइटें ट्रैफिक पैटर्न का विश्लेषण करने और विज्ञापन दिखाने के लिए करती हैं. ये टूल्स यह पहचानने में मदद करते हैं कि कोई यूजर क्या देख रहा है और उसे किस तरह के कंटेंट या विषयों में दिलचस्पी है. उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन कोई नया टीवी खोजता है और उसके बाद उसे अलग-अलग वेबसाइटों पर टीवी के विज्ञापन दिखने लगते हैं, तो अक्सर ऐसे ट्रैकिंग सिस्टम ही पर्दे के पीछे काम कर रहे होते हैं.
अगर अदालत में लगाए गए आरोप सच साबित होते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि ChatGPT पर पूछे गए सवालों का इस्तेमाल यूजर्स को टारगेटेड विज्ञापन दिखाने के लिए किया गया.
मुकदमे में दावा किया गया है कि OpenAI ने कैलिफोर्निया के निजता कानूनों का उल्लंघन किया है. इनमें कैलिफोर्निया इनवेज़न ऑफ प्राइवेसी एक्ट और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशंस प्राइवेसी एक्ट जैसे कानून शामिल हैं. वादी कंपनी से आर्थिक हर्जाना मांग रहे हैं और डेटा शेयर करने की इस कथित प्रथा को खत्म करने की मांग कर रहे हैं.