menu-icon
India Daily

जहां मौका मिला वहीं लगा दिया फोन चार्जर? जरा रुकिए, एक गलती और बैंक अकाउंट हो सकता है खाली

पब्लिक प्लेस पर लगे USB चार्जिंग स्टेशन से फोन चार्ज करना कई बार जोखिम भरा हो सकता है. साइबर ठग ऐसे पोर्ट में छेड़छाड़ कर फोन तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं.

reepu
Edited By: Reepu Kumari
जहां मौका मिला वहीं लगा दिया फोन चार्जर? जरा रुकिए, एक गलती और बैंक अकाउंट हो सकता है खाली
Courtesy: ChatGpt

नई दिल्ली: स्मार्टफोन आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. कॉल, ऑनलाइन पेमेंट, टिकट बुकिंग से लेकर जरूरी दस्तावेजों तक, कई काम फोन से ही पूरे होते हैं. ऐसे में बैटरी कम होते ही लोग किसी भी उपलब्ध चार्जिंग पोर्ट की तलाश करने लगते हैं. एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मेट्रो और बस स्टैंड जैसी जगहों पर लगे सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन इसी जरूरत को पूरा करते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है.खाली चार्जिंग पोर्ट देखकर तुरंत फोन लगाना हमेशा सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता. साइबर ठग सार्वजनिक USB चार्जिंग स्टेशनों में छेड़छाड़ करके लोगों के फोन को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं. इस तरीके को जूस जैकिंग कहा जाता है. USB कनेक्शन सिर्फ बिजली पहुंचाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उससे डेटा ट्रांसफर भी संभव है. यही वजह है कि सार्वजनिक चार्जिंग सुविधा का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहना जरूरी हो जाता है.

क्या है जूस जैकिंग?

पब्लिक USB चार्जिंग पोर्ट के जरिए फोन को निशाना बनाने वाले साइबर हमले को जूस जैकिंग कहा जाता है. इसमें साइबर ठग सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन से छेड़छाड़ कर सकते हैं या किसी फर्जी चार्जिंग स्टेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं. USB कनेक्शन के जरिए फोन में डेटा ट्रांसफर की सुविधा भी होती है. इसी वजह से ऐसे कनेक्शन का गलत इस्तेमाल कर डिवाइस तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा सकती है.

चोरी हो सकती हैं संवेदनशील जानकारियां

ऐसे हमले में साइबर ठग फोन में मैलवेयर पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं. इसके बाद डिवाइस में मौजूद संवेदनशील जानकारी निशाने पर आ सकती है. इसमें बैंकिंग डिटेल्स, OTP और निजी फाइलें शामिल हो सकती हैं. कुछ मामलों में व्यक्तिगत तस्वीरों तक पहुंच बनाने की कोशिश भी की जा सकती है. यही कारण है कि सार्वजनिक USB पोर्ट का इस्तेमाल करते समय सिर्फ फोन की बैटरी चार्ज होने पर ध्यान देने के बजाय डेटा सुरक्षा का भी ख्याल रखना जरूरी है.

चार्जिंग स्टेशन से कैसे होता है कनेक्शन?

साइबर ठग किसी चार्जिंग पोर्ट या स्टेशन में छोटा हार्डवेयर अथवा छिपा हुआ कंप्यूटर डिवाइस लगा सकते हैं. फोन को ऐसे पोर्ट से कनेक्ट करने पर वह उस डिवाइस के संपर्क में आ सकता है. अगर चार्जिंग के दौरान स्क्रीन पर ‘Trust this device’ या ‘Allow Data Transfer’ जैसा विकल्प दिखाई दे और यूजर बिना सोचे उसे स्वीकार कर ले, तो डेटा तक पहुंच बनाने का रास्ता खुल सकता है. इसलिए ऐसे विकल्पों को समझे बिना अनुमति नहीं देनी चाहिए.

फोन को सुरक्षित रखने का आसान तरीका

पब्लिक USB पोर्ट से सीधे फोन चार्ज करने के बजाय अपना चार्जिंग एडेप्टर साथ रखना बेहतर विकल्प है. एडेप्टर को सीधे इलेक्ट्रिक सॉकेट में लगाकर फोन चार्ज किया जा सकता है, जहां मुख्य रूप से बिजली की आपूर्ति होती है. इसके अलावा USB डेटा ब्लॉकर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जो USB के डेटा पिन को ब्लॉक करके केवल पावर सप्लाई की अनुमति देता है. सफर के दौरान अपना पावर बैंक रखना भी उपयोगी विकल्प है.