नई दिल्ली: जब से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने दुनिया में कदम रखा है, तब से लोगों के जीने का तरीका काफी एडवांस हुआ है. अब आपको लग रहा होगा कि ये कैसे हुआ. इसका पता लगाने के लिए आपको खुद पर थोड़ा और ध्यान देना होगा. हम सभी में AI ने काफी बदलाव किया है, जिसे शायद हम नजर अंदाज कर देते हैं. देखा जाए तो AI केवल सवालों का जवाब देने या फिर फोटो बनाने वाली टेक्नोलॉजी नहीं रह गई है. बल्कि यह धीरे-धीरे हमारे फोन, कार, ऑफिस, पढ़ाई, एंटरटेनमेंट में अपनी जगह बना रही है.
जैसे सुबह उठते ही अलार्म बंद करना, मोबाइल देखना, मौसम चेक करना, ऑफिस के लिए निकलना और दिनभर काम में व्यस्त रहना... ये हमारे रोज के काम हैं. लेकिन जरा सोचिए, अगर आने वाले समय में इन छोटे-बड़े कामों का बड़ा हिस्सा AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खुद संभालने लगे तो? क्या इसके बाद हमारे जीने का तरीका और भी ज्यादा बदल जाएगा? अगर ऐसा होता है, तो क्या होगा चलिए समझते हैं.
अगर AI हमारे जीवन का हिस्सा पूरी तरह बन जाए तो हमारे रोजमर्रा के काम पर सीधा असर होगा. आज हम किसी जगह जाने के लिए मैप खोलते हैं, खाना मंगाने के लिए ऐप इस्तेमाल करते हैं और किसी जानकारी के लिए इंटरनेट पर सर्च करते हैं. ये सब काम अलग-अलग किया जाता है. लेकिन आने वाले समय में AI इन सभी चीजों को एक साथ जोड़ सकता है. उदाहरण के तौर पर- हम AI से कह सकते हैं कि आज का पूरा दिन आपके हिसाब से प्लान कर दे. वह आपको कपड़े पहनने से लेकर ऑफिस के रास्ते तक और मीटिंग का शेड्यूल सब बता देगा.
AI को लेकर सबसे ज्यादा डर का कार नौकरी से हाथ धो बैठना है. कई लोगों का मानना है कि अगर AI आ जाता है तो क्या वो नौकरी खत्म कर देगा. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि AI कई ऐसे काम कर सकता है, जिन्हें आज इंसान करते हैं. इसमें रिपोर्ट लिखने से लेकर डाटा को व्यवस्थित करना शामिल है. वीडियो एडिट करना हो या फोटो बनाना, सारा काम सेकेंडों में हो जाता है. वहीं, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि AI नौकरियां खत्म नहीं बल्कि पैदा कर सकता है. AI को चलाने, उसकी निगरानी करने, डाटा तैयार करने और AI आधारित सिस्टम बनाने वाले लोगों की जरूरत बढ़ सकती है.
आजकल स्कूल-कॉलेज में पढ़ाई का तरीका बदल रहा है. छोटे बच्चों को भी AI के बारे में सिखाया जा रहा है. अगर किसी बच्चे को किसी सब्जेक्ट में दिक्कत महसूस हो रही है, तो वो AI से पूछकर उसे आसान भाषा में समझ सकता है. AI उसे आसान उदाहरणों के साथ बार-बार समझा सकता है. इससे पढ़ाई को पर्सनलाइज्ड किया जा सकता है.
AI हेल्थ सेक्टर में तेजी से अपनाया जा रहा है. मेडिकल रिपोर्ट के पैटर्न को पहचानने से लेकर बीमारी के शुरुआती संकेतों को समझने तक, यह डॉक्टरों की काफी मदद कर रहा है और आगे भी कर सकता है. लेकिन क्या इससे डॉक्टर की जरूरत खत्म हो जाएगी. इसका जवाब है नहीं, क्योंकि आखिरकार मरीज की स्थिति को समझना, सही फैसला लेना और इलाज की जिम्मेदारी इंसान के पास ही रहेगी. ऐसे में AI डॉक्टर का स्मार्ट अस्सिटेंट बन सकता है.
आज स्मार्ट टीवी, स्मार्ट स्पीकर और स्मार्ट कैमरे आम हो चुके हैं. आगे चलकर AI इन डिवाइस को एक-दूसरे से कनेक्ट कर सकता है. अगर घर से निकलने के बाद आपको ध्यान आता है कि आपने लाइट-एसी बंद नहीं किया है, तो आप AI से यह काम आसानी से करा सकते हैं. वहीं, कुछ एसी ऐसे भी हैं, जिन्हें आप घर आने से पहले ऑन कर सकते हैं. यानी स्मार्ट होम सिर्फ आवाज से लाइट ऑन करने तक सीमित नहीं रहेगा.