नई दिल्ली: अगर कंप्यूटर या फोन से कोई फाइल डिलीट की जा सकती है, तो क्या इंसान के दिमाग से भी कोई पुरानी याद हटाई जा सकती है? यह सवाल आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्रेन टेक्नोलॉजी के तेजी से विकास के बीच काफी दिलचस्प हो गया है. हालांकि, वैज्ञानिक दिमाग और यादों को समझने पर लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन किसी खास पुरानी याद को चुनकर उसे पूरी तरह मिटा देना अभी संभव नहीं है.
इंसानी दिमाग को कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव समझना सही नहीं होगा. कंप्यूटर में फाइल एक निश्चित जगह पर सेव होती है, लेकिन इंसानी यादें दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच बने कनेक्शन और एक्टिविटिज से जुड़ी होती हैं. जब हम कोई घटना याद करते हैं, तो दिमाग में कई तरह के संकेत एक्टिव होते हैं. इसी मुश्किल प्रोसेस के कारण किसी एक याद को पहचानकर उसे सीधे डिलीट करना बेहद मुश्किल है.
आज ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) जैसी तकनीकें दिमाग से निकलने वाले संकेतों को कंप्यूटर तक पहुंचाने में मदद कर रही हैं. AI इन संकेतों में मौजूद पैटर्न को समझने में वैज्ञानिकों की सहायता कर सकता है. इससे रिसर्चर्स को यह जानने में मदद मिल रही है कि इंसानी दिमाग विचारों और यादों से जुड़े संकेत कैसे पैदा करता है.
क्या भविष्य में यादें मिटाई जा सकेंगी?
भविष्य में ब्रेन टेक्नोलॉजी और बेहतर होने पर यादों को प्रभावित करने की क्षमता बढ़ सकती है. लेकिन किसी एक याद को हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म कर देना अभी भी बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है. समय के साथ कुछ यादें कमजोर हो सकती हैं या उनका भावनात्मक असर बदल सकता है, लेकिन इसे कंप्यूटर की फाइल डिलीट करने जैसा नहीं माना जा सकता. फिलहाल वैज्ञानिकों का लक्ष्य यादों को मिटाना नहीं, बल्कि दिमाग और उसकी यादों को बेहतर तरीके से समझना है.