देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना 2027 के दूसरे चरण की शुरुआत 1 सितंबर से हो रही है. यह चरण राज्य के उन दुर्गम और बर्फीले इलाकों में शुरू किया जा रहा है, जहां सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण पहुंचना मुश्किल हो जाता है. इस चरण में उत्तराखंड के चार जिलों के चुनिंदा गांव और कस्बे शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि इस बार जनगणना में पहली बार जाति से जुड़ा सवाल भी पूछा जाएगा.
इस चरण के तहत उत्तरकाशी के 69 गांव, चमोली के 23 गांव, पिथौरागढ़ के 35 गांव और रुद्रप्रयाग के 4 गांव शामिल हैं. इसके अलावा गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ में भी आबादी की गणना की जाएगी. कुल मिलाकर करीब 131 गांव और 3 कस्बों की लगभग 52 हजार आबादी को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है.
जनगणना संचालन निदेशालय के अनुसार इस काम के लिए करीब 162 प्रगणक और 34 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं. कर्मचारियों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है. इस बार जनगणना की पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जाएगी. कर्मचारियों द्वारा लोगों के घर पहुंचकर निर्धारित जानकारी दर्ज की जाएगी.
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी खासियत जाति से जुड़ी जानकारी का शामिल होना है. जनगणना में परिवार और पहचान, शिक्षा और भाषा, रोजगार, जन्म और माइग्रेशन समेत अलग अलग विषयों से जुड़े कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे. जाति से संबंधित जानकारी भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होगी.
सरकार ने लोगों के लिए सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा भी शुरू की थी. उत्तराखंड में यह सुविधा 17 से 31 अगस्त तक उपलब्ध रही. हालांकि इसका लोगों ने बहुत कम इस्तेमाल किया. अब तक केवल 290 लोगों की ओर से सेल्फ एन्यूमरेशन कराया गया.
अधिकारियों के मुताबिक कम प्रतिक्रिया की एक बड़ी वजह इन क्षेत्रों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां हैं. इन इलाकों में रहने वाले कई लोग लंबे समय तक अपने गांव और घरों से बाहर रहते हैं. चरवाहा समुदाय के लोग मौसम के अनुसार अलग अलग स्थानों पर आवाजाही करते हैं. ऐसे में घर बैठे ऑनलाइन जानकारी दर्ज कराना उनके लिए आसान नहीं रहा.
अब सेल्फ एन्यूमरेशन के बजाय सरकारी कर्मचारी खुद लोगों के घरों और संबंधित स्थानों पर पहुंचकर परिवार के प्रत्येक सदस्य की जानकारी दर्ज करेंगे. यह प्रक्रिया 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगी.
इसके बाद पांच दिन का रिवीजनल राउंड होगा. इस दौरान अगर किसी व्यक्ति या परिवार की जानकारी दर्ज होने से छूट गई है या दर्ज जानकारी में किसी तरह की गलती है, तो उसे सुधारने का मौका मिलेगा. इस तरह दुर्गम इलाकों में रहने वाली आबादी को जनगणना की प्रक्रिया में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा.