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बुरा फंसा Google, मोनोपोली के चक्कर में अब काट रहा कोर्ट के चक्कर!

Google Monopoly Case: गूगल सर्च इंजन को लेकर मोनोपोली की बात सामने आ रही है. अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज अमित मेहता ने इसे लेकर एक फैसला सुना है जिसमें इस मोनोपोली को अवैध करार दिया है. इस मामले में पिछले 10 हफ्ते से सुनवाई चल रही है और इसमें क्या कुछ हुआ है, चलिए जानते हैं. 

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बुरा फंसा Google, मोनोपोली के चक्कर में अब काट रहा कोर्ट के चक्कर!
Courtesy: Social Media

Google Monopoly Case: सर्च इंजन को लेकर गूगल की मोनोपोली है, ये तो आप सभी जानते हैं. इस मामले को लेकर यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने गूगल पर आरोप लगाया है. कहा गया है कि गूगल ने अपनी मोनोपोली बनाने और दुनिया का डिफॉल्ट सर्च इंजन बनने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं. कंपनी को लेकर कहा गया है कि यह अपने कॉम्पिटिटर्स पर गलत तरह से दबाव डाल रहा है. ऐसे में देखा जाए तो यह हिस्ट्री में सबसे अहम एंटीट्रस्ट चैलेंजेज में से एक है. 

गूगल सर्च इंजन ने कॉम्पेटीशन को करने और इनोवेशन को रोकने की कोशिश की है. एक जज ने इसे लेकर ऐसा फैसला सुनाया है जो इंटरनेट को बदल सकता है और दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक में बदलाव ला सकता है. यह फैसला अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज अमित मेहता ने सुनाया है. उन्होंने देश के सबसे बड़े एंटीट्रस्ट चैलेंज के बारे में बात की. 

क्या है डिस्ट्रिक्ट जज अमित मेहता का कहना: 

1. सबूत में Google, Microsoft और Apple के टॉप अधिकारियों की गवाही शामिल थी और यह केस 10 हफ्ते तक चला.

2. जज अमित मेहता ने 277-पेज के फैसले में कहा कि गवाहों की गवाही और सबूत को ध्यान में रखकर और सारी बातों पर गौर करने के बाद कोर्ट इस फैसले पर पहुंचा है कि गूगल मोनोपोलिस्ट है और इसने अपने एकाधिकार बनाए रखने के लिए काम किया है. 

3. आगे कहा गया कि Google का नॉर्मल सर्च सर्विसेज के लिए मार्केट में 89.2% हिस्सा है जो मोबाइल डिवाइसेज में बढ़कर 94.9% हो जाता है.

4. यह फैसला Google के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि यह यूजर्स के बीच बेहद ही लोकप्रिय है. गूगल सर्च पर करीब-करीब हर दिन दुनियाभर से 8.5 बिलियन सवाल पूछे जाते हैं. यह 12 साल पहले की तुलना में दोगुना है. 

5. Google के ग्लोबल मामलों के अध्यक्ष केंट वॉकर ने कहा, "फैसले के अनुसार गूगल सबसे अच्छा सर्च इंजन उपलब्ध कराता है लेकिन यह इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि हमें इसे आसानी से उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

6. अमेरिकी अटॉर्नी जनरल मेरिक गारलैंड ने इस फैसले को अमेरिकी लोगों की ऐतिहासिक जीत बताया है. साथ ही कहा कि कोई भी कंपनी कानून से ऊपर नहीं है.