नई दिल्ली: गलगोटियास यूनिवर्सिटी विवादों में चल रही है. दरअसल, हाल ही में इंडिया एआई समिट में इस यूनिवर्सिटी ने एक चीनी रोबोडॉग को अपना बताकर शोकेस किया, जिसके बाद इसे ऑनलाइन काफी ट्रोल किया जा रहा है. इसके बाद इसे समिट से बाहर भी कर दिया गया है. हालांकि, यूनिवर्सिटी ने इस पर क्लैरिफिकेशन भी जारी कर दिया है.
अब एक और सवाल इस यूनिवर्सिटी पर उठ रहा है. इनका एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें सॉकर ड्रोन के बारे में बताया जा रहा है. उस समय यूनिवर्सिटी ने सॉकर ड्रोन को लेकर दावा किया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी ने अपनी खुद की एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से इस प्रोडक्ट को डेवलप किया है.
इस वीडियो में गलगोटियास यूनिवर्सिटी के एक स्टाफ ने कहा है, "मूल रूप से, एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर एप्लिकेशन तक, हमारे पास एक सिमुलेशन लैब से लेकर एप्लिकेशन एरिना तक है और यह कैंपस में भारत का पहला सॉकर एरिना है."
Galgotia University strikes again
— Amock_ (@Amockx2022) February 18, 2026
After Chinese robot, they claimed that they built soccer drone from scratch in their campus
Reality : It is commercially available in market at just ₹40000 as Striker V3 ARF 😭😭
What kind of frauds are they?
pic.twitter.com/3BBu4NE2xH
इसे लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स ने दावा किया है कि ड्रोन एक कमर्शियली उपलब्ध मॉडल है. इसे स्ट्राइकर V3 ARF भी कहा जाता है. इसे भारतीय बाजार में करीब 40,000 रुपये में खरीदा जा सकता है. हेलसेल स्ट्राइकर V3 असल में साउथ कोरिया के हेलसेल ग्रुप द्वारा ड्रोन स्पोर्ट्स के लिए बनाया गया एक सॉकर ड्रोन है.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रिप्रेजेंटेटिव को एक्सपो एरिया खाली करने के लिए कहा गया था. दरअसल, इस यूनिवर्सिटी ने एक चीनी रोबोडॉग को अपना बताकर पेश किया था. डिस्प्ले पर यूनिट्री Go2 रोबोट था, जो चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का बनाया हुआ मॉडल है. बता दें कि यह मशीन भारत में ऑनलाइन 2 लाख रुपये से 3 लाख रुपये के बीच उपलब्ध है. समिट में इस डिवाइस को ओरियन लेबल के साथ डिस्प्ले किया गया है. यहां क्लिक कर पढ़ें सभी डिटेल्स.